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Assembly election: कांग्रेस की चाह पाली की 4 सीटें जीतने की

विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस एक्टिव मोड में विधानसभा चुनावों के समीकरणों पर चर्चा

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पाली

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Rajeev Dave

Jul 22, 2023

Assembly election: कांग्रेस की चाह पाली की 4 सीटें जीतने की

Assembly election: कांग्रेस की चाह पाली की 4 सीटें जीतने की

मारवाड़ की कई सीटों पर बरसों से सूखा झेल रही कांग्रेस इस बार पूरी संभावनाएं तलाश रही है। इसके लिए पहली बार आलाकमान एक्टिव मोड पर दिखाई दिया है। प्रदेश प्रभारी सुखजिंदरसिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा और सहप्रभारी वीरेन्द्रसिंह राठौड़ ने पाली जिले के कांग्रेस नेताओं से जयपुर में कई घंटे मंथन किया। जिले की छहों सीटों पर हार-जीत के गणित और संभावित प्रत्याशियों पर चर्चा की। जातिगत समीकरणों और हार के कारणों पर भी पार्टी नेताओं ने गहनता से विचार विमर्श किया। साथ ही अगले चार माह बाद होने वाले चुनावों में छह में से कम से कम चार सीटें जीतने का लक्ष्य भी तय किया। इसके लिए हर स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है।
आलाकमान की दो टूक-अब न्यूसेंस बर्दाश्त नहीं
बैठक की शुरुआत में ही प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने पाली के कांग्रेस नेताओं को दो टूक कहा कि इस बार पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को भविष्य में कभी भी पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जो हुआ सो हुआ अब आगे एकजुट होकर पार्टी आलाकमान के फैसले पर काम करना है। उन्होंने पाली में हर हाल में कांग्रेस की ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य दिया।
हर सीट पर किया मंथन, सुझाव भी मांगे
आलाकमान ने हर एक पार्टी नेता से सुझाव मांगा कि उनकी सीट कैसे जीती जा सकती है। पिछली हार के कारणों और समीकरणों पर भी राय ली। उन्होंने बैठक में शामिल एक-एक नेता से कहा कि वे दिल खोलकर बात करें, लेकिन आरोप-प्रत्यारोपों से बचें। कांग्रेस नेता शिशुपालसिंह राजपुरोहित ने कोविड और बिपरजॉय के दौरान सक्रियता समेत कई बिंदुओं पर अपनी बात कही तो नीलम बिड़ला ने कहा कि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़े तो जीतने से कोई नहीं रोक सकता। प्रदेश सचिव भूराराम सीरवी, जिलाध्यक्ष अजीज दर्द समेत कई अन्य नेताओं ने भी सुझाव दिए।
ये रहे मौजूद
प्रदेश सचिव भूराराम सीरवी, डिम्पल राठौड़, जिलाध्यक्ष अजीज दर्द, पूर्व विधायक भीमराज भाटी, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र गोयल, कांग्रेस नेता शिशुपालसिंह राजपुरोहित, रंजू रामावत, महावीरसिंह सुकरलाई, नीलम बिड़ला, खेतसिंह मेड़तिया, चुन्नीलाल चाड़वास, मोहन हटेला, सुमित्रा जैन, गोरधन देवासी, दुर्गासिंह राठौड़ समेत 25 नेता शामिल रहे।