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पुत्र की आत्महत्या के बाद पिता ने की देहदान की घोषणा, मेडिकल कॉलेज ने कर दिया इनकार

- दोपहर तक परिजन देहदान के लिए करते रहे जतन

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पाली. जिले में रविवार को देहदान के इतिहास में एक ओर नाम जुडने वाला था। लेकिन, कोर्ट के एक आदेश के कारण पाली में यह चौथा देहदान नहीं हो पाया। जोधपुर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने शव लेने से इनकार कर दिया तो परिजन अपने बेटे का अंतिम संस्कार करवाने के लिए घर लेकर चले गए।

पुलिस के अनुसार कोतवाली थाना क्षेत्र के रामदेव रोड स्थित दुर्गा कॉलोनी निवासी कैलाश पुत्र रामेश्वरलाल कुमावत ने रविवार सुबह अज्ञात कारणों से अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन कैलाश के शव को लेकर बांगड़ अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कैलाश की मृत्यु के बाद उसके पिता रामेश्वरलाल ने उसका देहदान करने का निर्णय लिया। रामेश्वरलाल ने बताया कि उनका बेटा धार्मिक प्रवृति का था। लोगों की मदद करने में विश्वास करता था। इसके चलते उसके देहदान की प्रक्रिया को शुरू करवाया। लेकिन, जब परिजनों ने मेडिकल कॉलेज में देहदान सम्बंध में फोन किया तो उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिजन कैलाश के शव को अंतिम संस्कार के लिए घर ले गए।

2008 में हुई थी मरणोपरांत देहदान करने की शुरुआत

शहर में मरणोपरांत देहदान करने की शुरुआत 2008 में हुई थी। तब वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. कीर्ति भाई बख्शी ने सबसे पहले देहदान करने की घोषणा की थी। उनके निधन के बाद परिजनों ने देह को जोधपुर मेडिकल कॉलेज को सौंपकर डॉ. बख्शी को अमर कर दिया था। उनकी प्रेरणा से कई जनों ने अपने संकल्प पत्र भरकर मेडिकल कॉलेज में जमा कराए थे। इसके बाद दूसरा देहदान 20 सितम्बर 2013 को हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले चंपालाल पूनमिया का किया गया था। अगले साल तक पाली में मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएगा। इसके बाद पाली मे भी देहदान हो सकेगा।

कैलाश का करवाए नेत्रदान

परिजनों की इच्छा पर कैलाश का नेत्रदान करवाया गया। आई बैंक सोसायटी सचिव केवलचंद कवाड़ ने बताया कि कैलाश की आंखों को डॉ. केएल मंडोरा, रईस खान, अशोक घावरी व रतन जावा के सहयोग से दान में प्राप्त कर रोडवेज के हजारीसिंह व महेंद्र के सहयोग से जयपुर भिजवाई गई। इस मौके पर मृतक के पिता रामेश्वरलाल, भाई हीरालाल, लक्ष्मण, सुरेश देवनारायण, हेमराज, विजय, भंवरलाल सेमलानी, राजीव कोठारी, संदीप मेहता, नरेंद्र तलेसरा, ललित पुंगलिया व राजेश कुमार सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

मर्डर व आत्महत्या के मामले में शव नहीं लेते

देहदान समाज में आ रही जागरूकता का एक संदेश है। पहले हत्या व आत्महत्या जैसे मामलों में स्थानीय पुलिस अधीक्षक, जिला कलक्टर व परिजनों के सहमति पत्र के आधार पर देहदान करवा दिया जाता था। लेकिन हाल में ही सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश आया है। इसके तहत हत्या व आत्महत्या जैसे मामले में देहदान नहीं करवाया जाता है।

- डॉ. अनुपसिंह, देहदान प्रभारी, मेडिकल कॉलेज, जोधपुर


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