
पाली. निर्देशक आर. बाल्की की फिल्म पैडमैन में अक्षयकुमार भले ही महिलाओं के दिक्कत वाले दिनों में उम्दा गुणवत्तायुक्त पैड इस्तेमाल करने का सार्थक संदेश देने में कामयाब हो गए हो। लेकिन, सरकारी प्रयास आज भी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। हालत यह है कि जयपुर-अजमेर के अलावा प्रदेश के शेष जिलों में आज भी सरकार को 'पैडमैन की तलाश है। कुछ समय पहले सरकार ने प्रदेश के जिलों में आधी आबादी के माहवारी वाले दिनों की समस्या को देखते हुए सैनेटरी नेपकीन मशीनें लगाने का ऐलान किया था। जयपुर व अजमेर ? सरीखे महानगरों में ऐसी मशीनें स्थापित हो गई, लेकिन राज्य के शेष जिलों में आज भी एक बड़ी आबादी दिक्कत वाले दिनों में या तो बाजार के महंगे सैनेटरी नेपकीन खरीदने को बाध्य है, या फिर घरों में कपड़े की कतरनों का इस्तेमाल करने को विवश हैं।
भामाशाहों के भरोसे छोड़ दी योजना
राज्य के शिक्षा विभाग ने भी इसी तर्ज पर बड़ी बालिका स्कूलों में मशीनें लगाने की योजना बनाई थी। हालत यह हुई कि कुछ स्कूलों में सैनेटरी नेपकीन उपलब्ध कराने और उन्हें उपयोग के बाद खत्म करने की दो अलग-अलग मशीनें लगाई गई। शेष स्कूलों को भामाशाहों के भरोसे छोड़ दिया गया। उन्हें कहा गया कि ये मशीनें स्कूलों में भामाशाहों के सहयोग से स्थापित की जाएं। असल में दोनों मशीनों की अनुमानित लागत पचास हजार रुपए पड़ रही थी। इस कारण योजना के क्रियान्वयन से शिक्षा विभाग ने अपने हाथ खींच लिए।
यह है प्रदेश में महिलाओं की स्थिति
कुल आबादी-68548437
पुरुष आबादी-35550997
महिला आबादी-32997440
पाली में यह है हालात
वर्ष 2011 की आबादी को आधार मानें तो जिले की कुल जनंसख्या 20 लाख 37 हजार 573 थीं। इसमें पुरुष आबादी 10 लाख 25 हजार 422 और महिला आबादी 10 लाख 12 हजार 151 आंकी गई। इस आंकड़े को आधार मानें तो उस समय जिले में एक हजार पुरुषों पर 987 महिलाएं थीं। बीते सालों में इस अनुपात में बहुत ज्यादा अंतर नहीं आ पाया है। हां, महिला आबादी की साक्षरता दर कम है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं की एक बड़ी आबादी आज भी दिक्कत वाले दिनों में बाजार से महंगे सैनेटरी नैपकीन खरीदने की बजाय कपड़े की कतरनों का उपयोग करती रही है। इससे भविष्य में कभी भी बड़े संक्रमण के हालात खड़े हो सकते हैं।
... तो इन्फेक्शन का खतरा
सैनेटरी नैपकीन के स्थान पर लम्बे समय तक कपड़े का इस्तेमाल करने से इन्फेक्शन के खतरे बढ़ जाते हैं। इससे खुजली और बच्चेदानी में खून का स्त्राव बढ़ सकता है। संक्रमण अगर नस के माध्यम से पेट में चला जाता है तो पेटदर्द के साथ पानी भरने की समस्या खड़ी हो सकती है। सफेद पानी ज्यादा जाने पर कैंसर जैसा खतरा भी पैदा हो सकता है।
-रोजी जोशी, गायनिक चिकित्सक
Published on:
23 Feb 2018 11:36 am
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