
गंजेपन की समस्या।
राजेन्द्रसिंह देणोक/ राजीव दवे
पाली। आधुनिक दिखने की चाह में कई युवा अब हेयर कलरिंग से लेकर बार-बार स्ट्रेटनिंग के तरीके अपना रहे हैं, लेकिन इस जुगत में उन्हें तनाव, थायराइड और गंजेपन की समस्याएं भी साथ में मिल रही हैं।
सामान्यत: वंशानुगत मामलों में 40 वर्ष के बाद लोगों में गंजा होने की समस्या होती थी, लेकिन अब बड़ी संख्या में युवा भी इससे पीड़ित हो रहे हैं। इस समस्या से ग्रस्त 30 से 40 वर्ष की उम्र के युवा काफी आ रहे हैं। गंजेपन की समस्या से महिलाएं भी पीड़ित हो रही हैं। महिलाओं में इसके मुख्य कारणों में तनाव, अव्यविस्थत दिनचर्या, ज्यादा कलरिंग, स्टाइलिंग और केमिकल के साथ डैंड्रफ है। जो बालों को कमजोर बनाते हैं। कई मामलों में दवा का सेवन, हार्मोन्स का असंतुलन भी कारण बनता है।
राजेश (बदला हुआ नाम) जिसकी उम्र करीब 32 साल है। उसके सिर के बाल उड़ गए हैं। गंजापन आ गया है। अब वे बाल कम झड़े, इसके लिए उपचार ले रहे हैं।
पाली निवासी सुशीला (बदला हुआ नाम) के बाल काफी छितराए से हो गए हैं। उम्र भी 38 साल ही है। वे भी लंबे समय से चिकित्सक से उपचार ले रही है।
स्ट्रेस, संतुलित आहार की कमी, फैमिली हिस्ट्री, हॉर्मोनल बदलाव, समस्या, प्रदूषण, अधिक जंक फूड का सेवन, प्रदूषित वातावरण में अत्यधिक एक्सपोजर थायरॉइड, ऑटो इम्यून डिसऑर्डर आदि गंजेपन के मुख्य कारण हैं। जब व्यक्ति के सिर में शुरुआत हेयर लाइन कम होने की स्थिति हो उसी समय चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए। इससे कारण पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सकता है।
जीवन शैली में बदलाव से हार्मोनल बैंलेंस बिगड़ना, फैमिली हिस्ट्री आदि कई कारण है। जिनसे गंजेपन की शिकायत होती है। युवाओं में पुरुषों के साथ ही महिलाओं के मामले भी सामने आ रहे हैं। गंजेपन की शुरुआत में ही जांच कर कारणों का पता लगाकर इसका उपचार किया जा सकता है। युवाओं को अपनी लाइफस्टाइल को भी बदलना चाहिए। जिससे यह समस्या ही नहीं हो। - डॉ. राजूसिंह राजपुरोहित, चर्म रोग विशेषज्ञ, बांगड़ चिकित्सालय, पाली
Published on:
03 Sept 2024 08:31 pm
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