
राजस्थान के युवक ने पेरिस में लहराया जीत का तिरंगा, साइकिल रेस में बना अंतरराष्ट्रीय चैम्पियन
पाली/रायपुर मारवाड़। International bicycle race competition : राजस्थान के पाली जिले के छोटे से गांव का युवक फ्रांस के पेरिस में जीत का तिरंगा लहरा चुका है। जी हां, रायपुर उपखण्ड क्षेत्र के मोहरा कलां गांव के काया बेरा निवासी 36 वर्षीय महेश सीरवी [ Mahesh Sirvi ] अंतरराष्ट्रीय साइकिल रेस में अवार्ड हासिल कर चुुका है। वर्तमान में कर्नाटक के मैसूर में रह रहे इस युवक की कामयाबी से सीरवी समाज व प्रवासीबंधु ने हर्ष व्यक्त किया।
मोहराकलां के बेरा काया निवासी ओगडऱाम सीरवी 40 साल पहले कर्नाटक के मैसूर चले गए। जहां उन्होंने परचूनी दुकान खोल परिवार का भरण पोषण करने लगे। ओगडऱाम के बेटे महेश का जन्म मैसूर में ही हुआ। महेश के जहन में बचपन से ही कुछ कर गुजरने की ललक थी। महेश को साइकिल चलाने में शुरू से दिलचस्पी रही। इससे साइकिलिंग के जरिए ही महेश ने रिकॉर्ड बनाने की ठान ली। रोजाना अभ्यास करते हुए महेश ने साइकिल से कम समय में अधिक दूरी तय करने की तैयारी शुरू कर दी।
कनार्टक में जीते डेढ दर्जन अवार्ड
महेश ने साइकिल की जहां भी रेस होती वहां हिस्सा लेना शुरू कर दिया। अब तक महेश ने नेशनल व स्टेट लेवल पर विविध प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर डेढ दर्जन से अधिक अवार्ड जीत लिए हैं। जीत का सेहरा बंधने से महेश ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर देश का नाम रोशन करने की ठान ली। पिछले साल 18 अगस्त को फ्रांस के पेरिस में अंतरराष्ट्रीय साइकिल रेस प्रतियोगिता हुई। इस 1200 किलोमीटर की दूरी 90 घंटे में तय करनी थी। इस प्रतियोगिता में 20 देशों के सात हजार खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। भारत देश से 340 खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। जिसमें महेश भी शामिल था। महेश ने यह दूरी 83 घंटे 10 मिनट में तय कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। महेश की इस जीत पर इनका परिवार काफी खुश है।
फिट रहने के लिए साइकिलिंग जरूरी
महेश की मैसूर में ज्लेवरी की दुकान है। ये रोजाना सुबह साइकिलिंग करने के साथ व्यायाम भी करते हंै। इससे फ्री होने के बाद ये अपनी दुकान पर जाते हैं। शाम को भी ये साइकिलिंग करते हैं। महेश का कहना है कि साइकिलिंग से शरीर न केवल फिट रहता है बल्कि कई रोगों से बचता है।
Published on:
29 Jan 2020 02:12 pm

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