-दिनेश शर्मा
पाली/गिरादड़ा। शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही में सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के लिए मोबाइल कक्षा-कक्षाओं में ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हो, लेकिन पाली शहर से सटा एक ऐसा गांव है। जहां यह नियम पिछले एक साल से लागू है। हम बात कर रहे हैं गिरादड़ा गांव के आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय की।
दरअसल, गिरादड़ा गांव के आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ने एक वर्ष पहले शिक्षकों के साथ बैठक कर कक्षा में मोबाइल नहीं ले जाने की बात रखी। इसे सभी अध्यापकों ने तुरन्त स्वीकार कर सहमति जता दी। उस दिन से आज तक अध्यापक स्कूल आते ही अपने मोबाइल प्रधानाचार्य की टेबल पर रखते हैं इसके बाद कक्षाओं में जाते है। शिक्षकों का कहना है कि ऐसा करने से पढ़ाते समय मोबाइल घनघनाता नहीं है और पढ़ाने की लय नहीं टूटती। बच्चों के साथ अध्यापक का ध्यान भी किताब व प्रश्नों से नहीं भटकता है।
कालांश के बाद संभाल लेते हैं
स्कूल के सभी अध्यापक मोबाइल प्रधानाचार्य की टेबल पर रखकर जाते है। इसके बाद कोई फोन आने पर प्रधानाचार्य की तरफ से उनको सूचना दे दी जाती है। कई बार प्रधानाचार्य भी कक्ष में नहीं होते हैं तो अध्यापक कालांश के बाद मिस कॉल जांचते और इसके बाद कार्यालय, स्टॉफ रूम या विद्यालय के मैदान में जाकर बात करते हैं। इसके बाद एक बार फिर प्रधानाचार्य कक्ष में फोन रखकर कक्षा में चले जाते हैं।
स्वेच्छा से बंद किया मोबाइल का उपयोग
विद्यालय के साथी स्वैच्छा से मोबाइल स्टॉफ रूम या मेरी टेबल पर रखकर कक्षाओं में पढ़ाने जाते हैं। उन पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उनका जरूरी कॉल आने पर स्टॉफ रूम या मेरे यहां बुलवा लिया जाता है। मैं जब सालभर पहले जवडिय़ा विद्यालय में था, तब भी वहां यह प्रयोग किया था। – चंद्रेशपालसिंह, प्रधानाचार्य, आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय गिरादड़ा