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राष्ट्रीय खेल दिवस विशेष : खेल में उभरते सितारे, अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर पर दिखा रहे दमखम

-ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं के प्रोत्साहन के लिए मैदान व संसाधन जरूरी

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पाली

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Suresh Hemnani

Aug 29, 2021

राष्ट्रीय खेल दिवस विशेष : खेल में उभरते सितारे, अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर पर दिखा रहे दमखम

राष्ट्रीय खेल दिवस विशेष : खेल में उभरते सितारे, अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर पर दिखा रहे दमखम

पाली। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म दिन रविवार को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस बार ओलम्पिक में भारतीयों के शानदार प्रदर्शन से खिलाडिय़ों में जोश है। पाली जिले में रहने वाले खिलाडिय़ों में भी अब ओलम्पिक में जाकर देश का नाम ऊंचा करने का जोश भर गया है। वैसे तो खेलों में यहां भी कई उभरते सितारे हैं, जो अपने दम पर राष्ट्रीय स्तर पर दमखम रहे हैं। ऐसी ही उभरती खेल प्रतिभाओं से पत्रिका ने बात की। पेश है उसके अंश...।

खेल कॉम्पलेक्स बने तो सपनों को लगे पंख
पाली/निमाज। राज्य की ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने और उन्हें तराश कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करने के लिए अब खेलों को बढ़ावा देने की की ओर कदम बढऩे लगे हैं। इसके लिए सरकार का हर ब्लॉक में खेल कॉम्पलेक्स का निर्माण का इरादा हैं। यह खेल कॉम्पलेक्स सरकारी स्कूलों में बनने हैं। ऐसे में जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत मुख्यालय निमाज पर खेल कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधा उपलब्ध होने पर क्षेत्र के हजारों बच्चों का खेलों की ओर झुकाव होगा और ग्रामीण प्रतिभाएं भी उभर कर सामने आएंगी। दरअसल, सरकार का भी मानना है कि गांवों में खेल कॉम्पलेक्स बनने से प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। नियमित खेलकूद शुरू होंगे तो गांवों में विद्यार्थी खेलों के प्रति रुझान रखेंगे। इससे गांव की प्रतिभाएं भी उभर कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचेगी।

ध्यानचंद के खेल को खिलाडिय़ों का इंतजार
खेल के गढ़ कहे जाने वाले क्षेत्र में अच्छे खेल मैदानों और संसाधनों की कमी के कारण राष्ट्रीय खेल हॉकी समेत अन्य खेल आज दम तोड़ते जा रहे हैं। यही कारण है कि खिलाड़ी भी धीरे-धीरे खेल से विमुख होते जा रहे हैं। खेलों की बात करें तो निमाज में काफी अच्छा इतिहास रहा है, यहां के खिलाड़ी हॉकी व बास्केटबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। वर्तमान में खेल संघ, खेल विभाग और प्रशासनिक उदासीनता के चलते खिलाडिय़ों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जिले में एक-दो स्थान को छोड़ दें तो न तो हॉकी के लिए समुचित खेल मैदान है और न ही संसाधन। यही कारण है कि आज हॉकी खेल स्कूल स्तर पर नाममात्र का रह गया है, जो कभी यहां खिलाडिय़ों की सबसे ज्यादा रुचि हुआ करती थी। मेजर ध्यानचंद के खेल को आज खिलाडिय़ों का इंतजार है। जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में मात्र तीन-चार टीमों का भाग लेना निकृष्ट दौर से गुजर रहे हॉकी खेल को दर्शाता हैं। आज इसे पुन जीवित करने की जरूरत है।

खेलों का गढ़ रहा है निमाज
खेलों के मामले में निमाज गढ़ रहा है। हॉकी में तो निमाज स्कूल की टीम लंबे समय तक प्रथम स्थान प्राप्त करती आई है। हॉकी से जुड़े लोगों की मानें तो जिले में स्कूली हॉकी शुरू होने के बाद जिले में निमाज ही ऐसा विद्यालय रहा जहां की हॉकी टीम ने हर वर्ष प्रतियोगिता में भाग लिया। निमाज की हॉकी टीम वर्षों तक लगातार प्रथम स्थान पर रही है। हॉकी, वॉलीबॉल की राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं के साथ लॉन टेनिस, बेडमिंटन, क्रिकेट, बास्केटबॉल, खो,-खो आदि खेलों की प्रतियोगिताएं निमाज में हो चुकी हैं, जिसमे राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय खिलाड़ी अपना खेल दिखा चुके हैं।

खिलाडिय़ों के लिए प्रयास कर रहे हैं
खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन देने और उन्हें तराशने के लिए खेलों को बढ़ावा देने की जरूरत हैं। इसके लिए खेल कॉम्पलेक्स जैसी सुविधाएं भी जरूरी हैं। गांवों में खेल कॉम्पलेक्स बनने से प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। भौतिक सुविधाएं व संसाधनों का होना जरूरी है। कस्बे के आदिनाथ स्टेडियम में बास्केटबॉल, रनिंग ट्रैक, वॉलीबॉल के खेल मैदान व सुविधाएं निश्चित ही खिलाडिय़ों को आगे बढऩे को प्रोत्साहित करेंगी। खिलाडिय़ों को अच्छी सुविधाएं खेल मैदान में मिले इसके लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है सफलता भी जल्द मिलेगी। -दिव्याकुमारी, सरपंच, ग्राम पंचायत, निमाज।

अभिलाषा गौड़ : बिना कोच लॉन टेनिस में बनीं धुरंधर
पाली की उभरती हुई लॉन टेनिस खिलाड़ी है अभिलाषा गौड़। हिम्मतनगर पुलिस लाइन में रहने वाले लक्ष्मण गौड़ की बेटी अभिलाषा की उम्र महज 12 साल है, लेकिन अपने हुनर और मेहनत के दम पर देशभर में नाम कमाया है। वह राष्ट्रीय स्तर की चार प्रतियोगिताएं अपने नाम कर चुकी है। देश के सर्वश्रेष्ठ अंडर 100 लॉन टेनिस खिलाडिय़ों में उसका नाम है। दो दिन पूर्व ही उसने अखिल भारतीय टेनिस संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता में डबल में सीरीज अपने नाम की है। वह प्रतिदिन पांच घंटे अभ्यास करती है। बिना कोच ही वह खेल में पारंगत बनीं हैं।

योगेश डीडवानिया : मिनी सॉफ्टबाल में जीता स्वर्ण
पाली के रहने वाले योगेश डीडवानिया पुत्र हेमशंकर शर्मा ने वर्ष 2018 में मिनी सॉफ्टबाल चैम्पियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर पाली का नाम रोशन किया था। वे बताते है कि वर्ष 2015 में सॉफ्टबाल खेलना शुरू किया। कोच विमलेश पंवार ने खेल की बारीकियां सिखाई। मेरी बहनों ने प्रेरित किया तो मिनी सॉफ्टबाल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। वर्ष 2019 में स्कूल गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया चैंपियनशिप में हमारी टीम ने गोल्ड मेडल जीता। अब चाह है कि देश के लिए सॉफ्टबाल खेलू।

अनिशा मेवाड़ा : कड़ी मेहनत व अभ्यास से मिली सफलता
स्पीड बाल खेल में ढाबर गांव की रहने वाली अनिशा मेवाड़ा पुत्री गणपत मेवाड़ा ने गोल्ड जीता था। वे बताती है कि पिता व कोच कृष्णदेव सिंह ने उसको खेल के लिए प्रेरित किया। उसका सपना ऑलम्पिक में भारत के लिए गोल्ड जीतना है। इस सपने को इस बार के ऑलम्पिक खिलाडिय़ों ने बढ़ाया है। है। वे बताती है कि पालमपुर हिमाचल प्रदेश में हुई 65वीं राष्ट्रीय स्तर विद्यालयी खेल प्रतियोगिता में उन्होंने कड़ी मेहनत व अभ्यास से मुकाम पाया था। संस्था प्रधान डॉ. लादूसिंह भाटी ने उनको इसके लिए विदेश से खेल सामग्री मंगवाकर दी थी।

प्रतिभासिंह : नेशनल स्तर पर खेली, अब जुटी तैयारी में
पाली की प्रतिभासिंह को खेल में रुचि थी। उन्होंने लगातार तीन साल तक कड़ी मेहनत की। इसके बाद उनको सॉफ्टबाल 14 वर्ष छात्रा वर्ग की छत्तीसगढ़ में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला। उनका कहना है कि अब वे आगे की तैयारी में जुटी है। जिससे बड़ा मुकाम हासिल कर सके। इसके लिए प्रिंसिपल चेतना अम्बेडकर उनको लगातार प्रेरित करती है। वे कहती है कि सफलता के लिए एक-एक कदम ही बढ़ा जा सकता है। मैं नेशनल तक पहुंची और अब आगे की तैयारी कर देश का नाम रोशन करना चाहती हूं।

अंजली बंजारा : कबड्डी में दिखाया कमाल
सोजत ब्लॉक के भाटों की ढाणी लाणेरा की अंजली पुत्री भागीरथ बंजारा ने कबड्डी में दमखम दिखाया है। पहले बार वर्ष 2017-18 में छत्तीसगढ़ बिलासपुर में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता में भाग लिया। वर्ष 2020-21 में जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाई। इस पर उनका फिर नेशनल में चयन हुआ और छत्तीसगढ़ दुर्ग में टीम का प्रतिनिधत्व किया। कोच सम्पतराज बताते है कि अंजली खेल में खुद रणनीति बनाकर खिलाडिय़ों को प्रेरित करती है। वह मैराथन दौड़ व ऊंची कूद में भी रुचि रखती है। वह राउमावि राजोला कलां में अध्ययन कर रही है।

यहां खेल प्रतिभाएं अपार, सरकार ध्यान दें
पाली में मैदान और स्टेडियम पर्याप्त है। कोच नहीं है। इस कारण टेलेंट को तराशने का काम नहीं हो रहा। खिलाडिय़ों में प्रतिभा खूब है। खिलाड़ी को टेलेंट के आधार पर आगे बढ़ाने चाहिए। रोजगारोन्मुखी खेल नीति बनानी चाहिए। जिससे खिलाडिय़ों का मनोबल बढ़ेगा। -चम्पालाल सिसोदिया, सचिव, बास्केटबाल एसोसिएशन

खेलों में हरियाणा मॉडल लागू किया जाना चाहिए। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा। स्टेडियम में भी खेल सुविधाएं बढ़ाकर खेलों के प्रति माहौल अनुकूल बनाया जा सकता है। यहां कई खेलों में खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। -राजेश पाटनेचा, सचिव, टेनिस एसोसिएशन

बॉक्सिंग में बच्चों का अच्छा रुझान है। यहां कई प्रतिभाएं हैं जो राष्ट्रीय स्तर खेल चुकी है। बॉक्सिंग के लिए स्टेडियम में भी बच्चों को सुविधाएं मुहैया करवाने की जरूरत है। बॉक्सिंग के कोच भी नहीं है। अभी तो निजी स्तर ही प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में 50-60 बच्चे नियमित रूप से आ रहे हैं। -वासुदेव शर्मा, अध्यक्ष, बॉक्सिंग एसोसिएशन

स्टेडियम में प्रतिदिन बड़ी तादाद में खिलाड़ी खेलने आते हैं। यहां खेल का माहौल बनाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। कुछ सुविधाएं और संसाधन बढ़ाकर खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए नगर परिषद प्रयास करें। -लहरीदास, कोच

जिला प्रशासन खेलों को बढ़ावा देने में रुचि नहीं दिखाता। जबकि जिला कलक्टर स्वयं क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष होते हैं। कुछ खेलों को छोडकऱ अन्य एसोसिएशन भी सक्रिय नहीं है। खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए केवल सरकार के भरोसे ही नहीं रहना चाहिए। भामाशाह भी मददगार बन सकते हैं। -मांगूसिंह दूदावत, उपाध्यक्ष, ओलंपिक एसोसिएशन

यहां खेलों में पर्याप्त संभावनाएं हैं। बांगड़ स्टेडियम में रॉ बाल के लिए भी नया मैदान तैयार करवाया है। यहां कई खिलाड़ी नियमित रूप से अभ्यास कर रहे हैं। इस खेल में कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं। -किशन मेवाड़ा, सचिव, रॉ बाल एसोसिएशन