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फैशन के बाजार में पाली की चूडिय़ां खास पसंद, जानिए…क्या है इनकी खासियत

सुहाग और श्रृंगार का प्रतीक चूडि़यां, पाली में बड़े पैमाने पर कारोबार

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Bangles in pali

फैशन के बाजार में पाली की चूडिय़ां खास पसंद, जानिए...क्या है इनकी खासियत

राजेन्द्रसिंह देणोक

पाली. ‘ बोले चूडिय़ां बोले कंगना, हाय मैं हो गई तेरी साजना...’। चूडिय़ां भारत का पारंपरिक गहना है। इसे महिलाएं कलाई में पहनती है। चूड़ी महिलाओं के सुहाग का प्रतीक है। यह श्रृंगार का भी एक अलंकरण है।
इस कारण भारतीय संस्कृति में चूडिय़ों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। महिलाओं के श्रृंगार की यह निशानी पाली में बड़े पैमाने पर तैयार होती है। पाली में चूडिय़ों का इतिहास यों तो पुराना है, लेकिन वर्तमान दौर में करीब सौ सालों से निर्माण किया जा रहा है। शुरुआत में नारियल के खोल पर चूडिय़ां बनती थीं। बाद में हाथ दांत और लाख की चूडिय़ां बनाई गई। अब करीब पांच दशक से प्लास्टिक की #Bangles का बड़ा कुटीर उद्योग पाली में संचालित हो रहा है।

शहर में चूड़ी का सालाना 10.15 करोड़ का होता है व्यवसाय
औद्योगिक नगरी पाली में दूसरा लघु उद्योग प्लास्टिक चूड़ी का है। जो करीब 35 से 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से रोजगार देता है। पाली में सौ से ज्यादा इकाइयां संचालित है। #Pali में निर्मित #Chudiyan की देश के कई हिस्सों में डिमांड है। चूड़ी पर रंग-बिरंगे नगीने और नक्काशी उसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यही कारण है कि यहां की चूडिय़ां महाराष्ट्र, बिहार, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात समेत कई राज्यों में सप्लाई की जाती है। फैशन के बाजार में भी यहां की चूडिय़ों की खासी डिमांड है।

अधिकांश लोग करते घरों में काम
चूड़ी बनाने का कार्य अधिकांश लोग घरों में ही करते हैं। केवल प्लास्टिक के स्क्रेप से पाइप बनाने का कार्य कुछ छोटी इकाइयों में होता है। इसके अलावा पाइप को काटना, उसमें नगीनों को लगाना आदि घरों में होता है। नगीने लगाने का कार्य अधिकांश महिलाएं घरों में ही करती है। जिससे उनको रोजगार मिलता है।


जीएसटी से परेशानी झेल रहा चूड़ी उद्योग
चूड़ी के रॉ मेटेरियल पर जीएसटी 18 प्रतिशत करने के कारण चूड़ी उद्योग परेशानी में है। साथ ही निर्माण के उपयोग में आने वाले अन्य उत्पादों की कीमतें भी बढ़ी है। पेट्रोल-डीजल के दाम अधिक होने से माल की ढुलाई बढ़ गई है। चूड़ी के लिए रेजिन हाडनर पहले 2500 में आता थाए जो अब 4000 रुपए में मिल रहा है। कलर पिगमेंट व पाइप बनाने के केमिकल में भी 10 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई है। पहले कलर पिंगमेट 320 में आता थाए जो अब 380 रुपए में आ रहा है। ऐसे में चूड़ी व्यवसाय पर दोहरी मार पड़ रही है।


जीएसटी बढऩे से परेशानी
जीएसटी बढऩे के कारण चूड़ी उद्योग में परेशानियां बढ़ गई है। तीन माह पहले जीएसटी बढ़ाई गई थी। उसके बाद से व्यापार मंद हो गया है। कई लोगों के सामने आर्थिक संकट भी आ रहा है। व्यापारियों की मांग है कि जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत की जाए। जिससे व्यापार को गति मिले।

सैय्यद नसुरुद्दीन, अध्यक्ष, पाली चूड़ी उद्योग संघ