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वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए आए 5 करोड़ पर लटकी तलवार

पीलीभीत

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Rajendra Singh Denok

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Updated: 5 Feb 2017, 12:07 PM IST

पाली. वन क्षेत्र में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए जापान सरकार के साथ भारत सरकार के संयुक्त प्रोजेक्ट की राशि पर तलवार लटक गई है। दो माह में यदि जल संसाधन विभाग स्वीकृति नहीं देता है तो 5 करोड़ की राशि लैप्स हो जाएगी। इसके बाद वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए गर्मी में मशक्कत करनी होगी।

दरअसल, जापान सरकार की ओर से भारत के वन क्षेत्रों में चलाए जा रहे प्रोजेक्ट जाइका 2 के तहत 5 करोड़ से अधिक की राशि जिले में 80 एनिकट निर्माण के लिए मिली। वन विभाग को निर्माण करवाने से पहले जल संसाधन विभाग को स्वीकृति लेनी होगी। 2 मीटर तक की ऊंचाई के एनिकट निर्माण को वैधता प्राप्त है, इसके बावजूद यह स्वीकृतियां विभाग में अटकी हैं। एेसे में वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर करोड़ों रुपए का यह बजट लैप्स हो सकता है। एक बार बजट लैप्स होने पर अप्रेल से जुलाई के बीच गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए पानी का संकट हो सकता है।

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इसलिए नहीं मिल रही स्वीकृति

बताया यह जा रहा है कि सरदारसमंद मामले में न्यायालय की ओर से एनिकट पर दिखाई गई सख्ती के कारण आगे जारी होने वाली कई स्वीकृतियां रोक दी गई। जबकि न्यायालय ने नियम विरुद्ध बने एकिनट तोडऩे पर सख्ती दिखाई थी।

वन विभाग गिना रहा एनिकट के यह फायदे

- वन क्षेत्रों में एनिकट बनने से वन्यजीवों के लिए पानी के स्रोत विकसित होते हैं।

- एनिकट से अतिवृष्टि के असर को कम कर सकते हैं।

- बारिश के पानी के साथ बांधों में आने वाली सिल्ट को एनिकट के जरिए रोका जा सकता है।

2 मीटर का एनिकट है नियमानुसार

सरकारी नियमों के अनुसार 2 मीटर तक की ऊंचाई का एनिकट बनाया जा सकता है। सेव टाइगर प्रोजेक्ट सहित अन्य वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में वन क्षेत्रों में एनिकट को आवश्यक बताया गया है। जिले के कुम्भलगढ़ वन क्षेत्र और रावली टॉडगढ़ सहित अन्य वन क्षेत्रों में इस प्रकार के एनिकट की आवश्यकता जताई जा रही है।

इनका कहना...

जिले में 80 एनिकट निर्माण के लिए करोड़ों रुपए का बजट आया हुआ है। हमने स्वीकृति के लिए कई बार जल संसाधन विभाग को पत्र लिखे हैं, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल रही।

- जी.के गज्जा, सहायक वन संरक्षक, पाली।