चुनाव से पहले मतदाताओं की टोह, जानीं उम्मीदें
का बिगुल बजने में ज्यादा समय नहीं है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, नेताजी की टिकटों की भागदौड़ तेज हो गई है, तो इधर राज्य व केन्द्र सरकार अपनी-अपनी योजनाओं के जरिए मतदाताओं को लुभाने में लगी है। लेकिन, आमजनता के मन में कुछ अलग ही विचार चल रहे हैं। चुनाव से पहले उनकी मन की टोह लेने के लिए आमजनता से बात की तो उनका ये ही कहना था कि जब तक पूरे पांच साल के कार्यकाल में कार्य नहीं हो, तब तक हम विकास की दौड़ में पीछे ही रहेंगे। राज्य व केन्द्र की योजनाओं को सराहा, लेकिन पेपरआउट मामले में युवा खफा नजर आए। चुनावी माहौल व उम्मीदों को लेकर युवाओं की राय-
आमजन परेशान
किसी भी पार्टी का नेता हो, सभी टिकटों की दौड़ में लगे हुए है। सरकार चुनावी साल में लुभावने वादे दे रही है। पाली को संभाग बनाने के बाद भी स्थिति बदलती नजर नहीं आ रही है। सड़कों की खस्ताहाल स्थिति किसी से छिपी नही है। पाली में विश्वविद्यालय व नगर निगम की मांग भी अधूरी है। युवाओं व महिलाओं को रोजगार देने सहित कई कार्य करने की जरूरत है। जमीन स्तर पर तो आम आदमी परेशान है।
मुकेश राठौड़, शहरवासी
हताशा मिली
सरकार बनी तब वादे तो खूब किए गए, लेकिन हमें बेरोजगारी की हताशा मिली। पेपट आउट होने से अभ्यर्थी ं व विद्यार्थी वर्ग भी नाराज है। वर्तमान सरकार से अब हमें उम्मीद है कि जिस तरह जिले व संभाग नए बनाए हैं। इनकी आधारभूत संरचना पर भी जल्द कार्य हो। इससे शहरों व गांवों में विकास तेजी से हो सकेगा। महिला सशक्तिकरण पर भी कार्य हो, तभी आदर्श राज्य की स्थापना हो सकेगी।
तखतराज, निजी स्कूल, शिक्षक
युवाओं की आस अधूरी
वर्तमान में चुनावी माहौल ऐसा है कि राजनेता वोट व टिकट के लिए भागदौड में जुटे है। पांच साल में सरकार ने जो वादे किए, उनमें से कई अभी धरातल पर नहीं उतरे है। हालांकि, योजनाओं से राहत देने की कोशिश की है। पाली में विश्वविद्यालय की मांग पूरजोर हुई, लेकिन युवाओं की आस अभी तक अधूरी है। सरकार को युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
-अशोक जांगिड़, शहरवासी
जनता मांग रही काम
पार्टी के नेता दावेदारी जता तो रहे हैं लेकिन जनता अब काम मांगती है। सरकार ने योजनाएं तो खूब लागू की है, लेकिन अभी योजनाओं का धरातल पर जो असर दिखना था, वो नहीं दिखा रहा है। इससे आमजन को पूरा लाभ नहीं मिला है। पाली संभाग बनने के बाद भी शहर का विकास अधूरा है। यूआईटी का चेयरमैन का पद लम्बे समय से रिक्त है। रोजगार के नए अवसर पैदा करने होंगे।
- जितेन्द्र भंसाली, शहरवासी
होने चाहिए काम
चुनावी माहौल में सभी सरकारें चुनावी रेवड़ियां बांट कर जनता को खुश करने में लगी हुई है। लेकिन, अब समय बदल गया है। अब बदलाव की जरूरत है। पिछले एक साल से वर्तमान सरकार जो योजनाएं लागू कर कार्य करवा रही है। वैसा ही कार्य किसी भी सरकार के कार्यकाल में पांच वर्ष तक होना चाहिए, तभी प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा।
सोहनसिंह राव, शहरवासी