
Patrika String : दर्द आज, सोनोग्राफी एक महीने बाद, फिर तो इलाज उसके भी बाद?
Patrika String in Pali Rajasthan : पाली के सबस बड़े जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज [ Pali Medical college ] चिकित्सालय में तब्दील होने के बाद यहां चिकित्सक आए, नई जांच मशीनें पहुंची, भामाशाहों ने वार्डोंं को वातानुकूलित करवा दिया...। इतना होने के बाद भी रक्त, सोनोग्राफी [ sonography ] व एक्स-रे [ X-ray ] जैसे सामान्य जांचों के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। सोनोग्राफी में तो यह इंतजार एक-दो घंटे का नहीं एक माह से अधिक का है।
पाली। बांगड़ चिकित्सालय [ Pali Bangar Hospital ] में उपचार कराने के लिए आउटडोर में जाने से पहले मरीज व उसके परिजनों को सौ बार सोचना पड़ता है। वहां पहुंचते ही पहले धूप व बरसात में खड़े होकर पर्ची बनाने में आधे से एक घंटे का इंतजार। पर्ची बनी तो मानो पहली सीढ़ी चढ़ गए। आउटडोर के चिकित्सक कक्ष के बाहर फिर कतार। गर्मी व उमस से बदन पसीने से तर और पैरों के थकान से जवाब देने के बाद मौका मिलता है चिकित्सक के पास स्टूल पर बैठने का। चंद मिनटों में बीमारी पूछकर चिकित्सक के जांच लिखते ही जांच कक्ष के बाहर फिर कतार। जांच का सेम्पल देने के बाद दवा के लिए कतार। दूसरे दिन या शाम को जांच रिपोर्ट लेने के लिए भी कतार। यह स्थिति गुरुवार को राजस्थान पत्रिका की पड़ताल में सामने आई...
सोनोग्राफी के लिए एक माह का इंतजार
चिकित्सालय के आउटडोर में मरीजों को सोनोग्राफी कराने के लिए एक माह आगे की तारीख दी जा रही है। उस तारीख को भी सोनोग्राफी होगी या नहीं। यह तय नहीं है। कारण सोनोग्राफी करने के लिए महज दो चिकित्सक ही होना। इनमें से एक चिकित्सक के अवकाश पर होने पर 70-80 सोनोग्राफी करने का बोझ आ जाता है। हालात यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों तक की एक-दो घंटे इंतजार करने के बाद सोनोग्राफी की जा रही है।
एक माह पहले दी थी तारीख
पेट में दर्द की तकलीफ है। एक माह पहले सोनोग्राफी कराने के लिए एक माह आगे की तारीख मिली थी। आज गांव से आई, लेकिन पिछले ढाई घंटे से बैठी हूं। डॉक्टर किसी दूसरी जगह अस्पताल में सोनोग्राफी करने गए है यह बताया जा रहा है। -रुकमणि, मरीज
मैं सुबह से बैठी हूं
मैं सुबह नौ बजे से सोनोग्राफी कराने बैठी हूं। करीब सवा महीने पहले आई तो बीस दिन बाद आकर सोनोग्राफी कराने को कहा था। इस पर दवा लेकर काम चलाया। वह पचीज़् गुम हो गई तो नई पचीज़् से आज की तारीख दी थी। आज भी इंतजार ही कर रही हूं। - विद्या, मरीज
मात्र एक विशेषज्ञ होने से परेशानी
रेडियोलॉजिस्ट के एक ही चिकित्सक है। मशीन होने के बावजूद कार्मिक की कमी से पेंडिंसी रहती है। हमारी प्राथमिकता गायनिक की सोनोग्राफी करवाते है। एक अन्य चिकित्सक सोनोग्राफी करते है, लेकिन वे केवल गायनिक की ही कर पाते है। उसमें भी गंभीर केस होने पर एक्सपर्ट से करवानी पड़ती है। एक चिकित्सक थे, उनका स्थानान्तरण हो गया है। -डॉ. दीपक वर्मा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पाली
यह है कारण
यहां चिकित्सक दो ही है, जो सोनोग्राफी करते है। इनमें से एक केवल गायनिक की सोनोग्राफी कर पाते है। विशेषज्ञ रेडियालॉजिस्ट एक ही है। इनमें से एक छुट्टी पर रहता है तो एक चिकित्सक रहता है। सोनोग्राफी प्रतिदिन 100 लिखी जा रही है, जो संभव नहीं है। दिन में 50-60 से अधिक नहीं होने से यह पेडेंसी बढ़ रही है।
मशीन चार, आदमी एक
सोनोग्राफी मशीन चार उपलब्ध है। रेडियोलॉजिस्ट चार की नियुक्ति हो तो यहां स्थिति बदल सकती है। मेडिकल कॉलेज में यह स्थिति इसलिए ज्यादा बढ़ रही है।
फिर जाते है प्राइवेट
मरीज चिकित्सकों को दिखाने के बाद जब एक महीने बाद सोनोग्राफी मिलने की स्थिति आती है तो प्राइवेट सोनोग्राफी मशीन पहुंचते है। जहां मरीज को 800 से 1000 रुपए देने पड़ते है। गरीब और जरूरतमंद के पास महीनाभर इंतजार करना मजबूरी है।
Published on:
26 Aug 2022 03:44 pm

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