
‘भगवान महावीर के सूत्र हर युग में प्रासंगिक’
पाली। आर्यावर्त पर अनेक महान पुरुषों ने जन्म लेकर प्राणी मात्र ही नहीं, जीव मात्र को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। चाहे वह प्रथम तीर्थंकर प्रभु आदिनाथ हो या अंतिम तीर्थंकर श्रमण भगवान महावीर। इनके जीवन व्रत को कोई प्राणी अवलोकन करता है तो मन में यह निश्चय विचार आता है कि मैं इतने दिन कहां रह गया? मेरा अब तक का जीवन काल व्यर्थ ही खो गया। वह इन महापुरुषों के जीवन व्रत को पढकऱ या इनके मुख से निकले हुए आप्त वचन को अपने जीवन में धारण करने के लिए लालायित रहता हैं।
आज श्रमण भगवान महावीर स्वामी का 2620वां जन्म कल्याणक महोत्सव हमारे सामने उपस्थित है। उस युग पुरुष ने हमारी चेतनाओं को जागृत करते हुए अपने आत्म मंथन के द्वारा जिन सूत्रों का निर्माण किया वह आज भी प्रासंगिक है। जिसे हम अपने जीवन को उत्कृष्ट मार्ग पर प्रशस्त कर सकते हैं। प्रभु महावीर ने 2600 वर्ष पहले ही उन सूत्रों का निर्माण कर दिया जिसे आज संपूर्ण विश्व में कोरोना जैसी महामारी के उपचार के लिए हम अपने जीवन में आत्मसात करते हुए औषधि के रूप में प्रयोग में ला सकते हैं।
परमात्मा महावीर के उन सूत्रों से यह स्पष्ट हो गया कि इन पांच मूल सिद्धांतों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह जैसे सूत्रों से कोरोना महामारी जैसे रोगों से निजात पाया जा सकता है। आइए, हम सब मिलकर उस परम पिता परमात्मा प्रभु महावीर के इस 2620वें जन्म कल्याणक महोत्सव पर मंगल कामना करें कि संपूर्ण विश्व में जनमानस के जीवन से कोरोना जैसे महामारी रोगों से निजात मिले।
Published on:
25 Apr 2021 06:16 am

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