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मंदिरों से घरों तक पहुंची कोलीवाड़ा की कला

मंदिरों के साथ घरों को राजशाही अंदाज में सजाने के लिए लोग पाली का रूख करते हैं। कारण है हमारे जिले के

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Mukesh Kumar Sharma

Apr 04, 2016

pali

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पाली।मंदिरों के साथ घरों को राजशाही अंदाज में सजाने के लिए लोग पाली का रूख करते हैं। कारण है हमारे जिले के कोलीवाड़ा गांव की वुडन कार्विंग आर्टिजन कला। जो देश भर में प्रसिद्ध है। इस कला के देश के कई मंदिर गवाह है।

उपेक्षित थी कला

अब तक उपेक्षित रही इस कला से प्रभावित होकर उद्योग विभाग इस कला को बेहतर प्लेटफार्म देकर इसे नई ऊंचाइयां प्रदान करने की कवायद में जुट गया है। इसी के तहत राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में पाली के म्यूजियम में प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। जिसमें सभी ने इस कला की सराहना की।

सुमेरपुर के निकट है गांव


यह कला जिले के सुमेरपुर शहर के निकट कोलीवाड़ा गांव की है। यहां मंदिरों की नक्काशी और सजावट का काम तो बहुत पहले से हो रहा हैं। अब इस कला ने नई राह पकड़ी है और यह कला घरों में राजशाही सजावट तक पहुंच गई है। नक्काशी और वुड कार्विंग की इस कला में लकड़ी के साथ कीमती धातु जैसे चांदी, सोना और जर्मन सिल्वर (व्हाइट मेटल) का उपयोग किया जाता है।

प्रदर्शन का मौका दिया

कोलीवाड़ा गांव में कुछ कारखाने हैं, जहां नक्काशी की जाती हैं। मंदिरों के अलावा अब घरों में चांदी और सिल्वर मेटल के फर्नीचर के प्रति रुझान बढ़ रहा है। उद्योग विभाग ने कला के प्रदर्शन का मौका दिया है। वीरेन्द्र कुमार, वुड कार्विंग आर्टिजन एवं उद्यमी


घरों में हो रही प्रचलित

कोलीवाड़ा में जो कला का काम होता है, उसे उचित प्लेटफार्म की जरूरत है। हमने बीते दिनों प्रदर्शनी में इस कला को जनता के सामने रखा। यह कला अब मंदिरों के अलावा घरों के फर्नीचर के रूप में भी प्रचलित हो रही है। सैय्यद रज्जाक अली, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र पाली।