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भगवान महावीर स्वामी के जीवनकाल में हुई थी मंदिर की स्थापना

गोडवाड़ क्षेत्र के तीर्थ स्थलों में है महत्वपूर्ण स्थल

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पाली

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Rajeev Dave

Sep 09, 2021

भगवान महावीर स्वामी के जीवनकाल में हुई थी मंदिर की स्थापना

नाणा गांव स्थित जैन मंदिर।

पाली. गोडवाड़ क्षेत्र के जैन तीर्थों में नाणा गांव का मंदिर महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस जैन मंदिर में मूलनायक की प्रतिमा की स्थापना भगवान महावीर के जीवनकाल में ही हुई थी। इस कारण यह मंदिर जीवित स्वामी के नाम से ही प्रसिद्ध है। जिसका प्रमाण इस लोकवाणी नाणा, दियाणा, नादिया, जीवित स्वामी वांदिया...में मिलता है। मंदिर में प्राप्त विसं 1017 से संवत 1659 तक के शिलालेखों से यह माना जाता है कि यह मंदिर के जीर्णोद्धार के समय के लेख है। इस मंदिर की प्राचीन शिल्पकला के पत्थर और प्राचीन लेख मंदिर के भूमिगत कमरे में रख कर उसे बन्द कर दिया गया है। ऐसा एक भूतल गांव की कोट धर्मशाला में होना बताया जाता है। जहां इस मंदिर का प्राचीन इतिहास दबा है।
मंदिर की प्रदिक्षणा में चौमुखी देहरी

जीवित स्वामी के नाम से विख्यात नाणा के भगवान महावीर स्वामी मंदिर के गर्भ गृह, गुढ़ मण्डप व रंग मण्डप आदि में प्रतिमाएं स्थापित है। मंदिर की प्रदिक्षणा में चौमुखी प्रतिमा की देहरी है। जिनकी कला अद्भूत है। भगवान महावीर की प्रतिमा का तोरणयुक्त परिकर शिल्पकला का शानदार नमूना है। मंदिर में नन्दीश्वर द्वीपका पाषाण पट्ट में नन्दीश्वर द्विप के शिखरबन्ध आकर्षण का केन्द्र है। बावन जिनालय वाले इस मंदिर के शिखर विशाल होने के कारण भव्य लगता है। मंदिर का प्रवेश द्वार अन्य मंदिरों से भिन्न है।

संवत 1659 का लेख उत्कीर्ण
मंदिर की नवचौकी पर संवत 1659 का एक लेख उत्कीर्ण है। जिसमें अमरसिंह मायावीर नामक राजा के त्रिभुवन नामक मंत्री के वंशज मूता नारायण को नाणा गांव भेंट देने का उल्लेख है। मंदिर और धर्मशाला की व्यवस्था नाणा की वद्र्धमान आनन्दजी जैन पेढ़ी देखती है। नाणा तीर्थ गोडवाड़ की छोटी पंचतीर्थ में स्थान रखता है। सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा, नादिया आदि तीर्थों की पंचतीर्थी में भी इसे शामिल किया गया है। मान्यता है के नाणक्यगच्छ का उद्गम स्थल भी नाणा ही है। इस गच्छ की उत्पत्ति विण् की बाहरवीं सदी से पूर्व हुई थी।