पाली। एक युवती के गर्दन पर गांठ हो गई थी, जिससे उसे गर्दन हिलाने में भी तकलीफ होती थी। उम्र के साथ इसका आकार भी बढ़ता जा रहा था। मेडिकल साइंस की भाषा में सिस्टिक हाइग्रोमा नाम की ये बीमारी जन्म लेने वाले करीब 16 हजार में से एक बच्चे में ही होती है। बांगड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने सोमवार को युवती का ऑपरेशन कर राहत पहुंचाई।
बांगड़ मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. के.सी. अग्रवाल ने बताया कि कंटालिया गांव की एक 25 वर्षीय युवती की गर्दन पर गांठ थी। दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल लाए। 18 मई को फिमेल सर्जिकल वार्ड बी में भर्ती किया गया। सोनोग्राफी करवाने पर सामने आया कि ये गांठ सिस्टिक हाइग्रोमा नामक बीमारी की है। इसका ऑपरेशन नहीं करवाने पर मरीज को इंफेक्शन का खतरा रहता है। इसके साथ ही खून बहने, भोजन करने में तकलीफ, सांस लेने में समस्या असहनीय दर्द होने की शिकायत भी रहती है। सोमवार को सर्जरी टीम में शामिल चिकित्सक एम.एल. लोहिया, डॉ. प्रभुदयाल, डॉ. अर्जुनाथ योगी, डॉ. दिनेश सोलंकी, डॉ. ओमप्रकाश सुथार व डॉ. नूपुर अबरोल की टीम ने सफल ऑपरेशन कर गांठ निकाली। उन्होंने बताया कि इस तरह की सर्जरी बांगड़ मेडिकल कॉलेज में संभवत: पहली बार हुई है।
गर्भ में रहता है खतरा
आमतौर पर सिस्टिक हाइग्रोमा जेनेटिक डिसआर्डर (अनुवांशिक समस्या) है। इसके अलावा कई बार छोटी-छोटी गलतियों के कारण भी इसका खतरा बढ़ जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान मां को किसी तरह का वायरल इंफेक्शन हो जाए तो शिशु को सिस्टिक हाइग्रोमा हो सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ड्रग्स और एल्कोहल का सेवन करती हैं, उनके शिशुओं में यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।
सिस्टिक हाइग्रोमा के लक्षण
ऐसा सिस्टिक हाइग्रोमा जो शिशु के जन्म के बाद बनना शुरू होता है। सिस्टिक हाइग्रोमा का मुख्य लक्षण किसी अंग पर मांस का छोटा या बड़ा उभार है, जो छूने में मुलायम और स्पंजी लगता है। सिस्टिक हाइग्रोमा ज्यादातर गर्दन पर होता है।