विटामिन बी-12 व विटामिन डी की कमी के रोगी आ रहे सामनेवृद्ध ही नहीं, युवाओं की भी याददाश्त कमजोर, हाथ-पैरों में हो रही झनझनाहट
शीर्षक देखकर चौंकना लाजिमी है, लेकिन अस्पतालाें में पहुंच रहे हड्डियों व मांसपेशियों में दर्द से पीडि़त रोगियों के बढ़ते आंकड़े तो इस ओर ही इशारा कर रहे हैं। कहने को तो ये बीमारी वृद्धावस्था में ही होती है, लेकिन अब तो यह बीमारी युवाओं के साथ बच्चों में भी हो रही है। इसका कारण प्रकृति के सामान्य वातावरण की जगह पर एयर कंडीशनर कमरों में बैठना, धूप का सेवन नहीं करने के साथ पौष्टिक खान-पान की कमी है। इससे शरीर में विटामिन-डी और विटामिन बी-12 की कमी हो जाती है। चिकित्सकों के पास पहुंचने वाले मरीजों में करीब 20-25 प्रतिशत मरीजों में इन दोनों की कमी सामने आ रही है। विटामिन की कमी इम्यूनिटी को भी प्रभावित करती है।
मौसम में बदलाव भी कारण
चिकित्सकों के अनुसार इस समय मौसम में बदलाव हो रहा है। दिन में गर्मी लगती है और सुबह व रात में सर्द मौसम हो रहा है। इससे भी मांसपेशियों में दर्द व थकान का अनुभव होता है। अधिक मात्रा में एंटीबायोटिक के उपयोग के साथ आंतों व लीवर में इंनफेक्शन से भी ऐसे ही लक्षण सामने आते हैं।
ऐसे समझें विटामिन डी की कमी के दुष्परिणाम
व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है। हड्डियों व जोड़ों में दर्द रहने के साथ थकान व सुस्ती होती है। कई लोगों के बाल झड़ते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए सुबह के समय गुनगुनी धूप का सेवन करना चाहिए। फल, दूध, दही का खाने में उपयोग करना चाहिए।
विटामिन बी-12 की कम हो सकती है प्लेटलेट्स
विटामिन बी की कमी से आंखों में समस्या, याददाश्त कमजोर होना, सांस में तकलीफ, हाथ-पैरों में झनझनाहट, थकान की समस्या होती है। रक्त में प्लेटलेट्स की कमी भी हो जाती है। जिसे पेनसाइटोपीनिया कहते हैं। ज्यादातर केस बी-12 की कमी के ही सामने आते हैं। इसकी कमी अधिकांश शाकाहारी लोगों में होती है। उन्हें दूध, दही और इससे बने उत्पादों का अधिक उपयोग करना चाहिए।
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सोचने समझने की क्षमता पर पड़ता असर
विटामिन बी 12 की कमी से व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता पर काफी असर पड़ता है। इसकी कमी से ध्यान लगाने में कठिनाई, याददाश्त कमजोर होना आदि समस्याएं होती है। कई गंभीर मामलों में विटामिन बी 12 की कमी के कारण डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन आदि समस्याओं भी हो सकती है। संतरा तथा पनीर भी विटामिन बी12 से भरपूर होता है। इसके अलावा अंगूर, कीवी, सेब जैसे अन्य खट्टे फल का सेवन करना चाहिए।
डॉ. एचएम चौधरी, आचार्य व प्रमुख विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, पाली