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पन्ना के विक्रमपुर में घुसा बाघ, फोड़े पटाखे-बजवाया बैंड, फिर भी दिनभर छकाता रहा

बाघ की दहशत में बीता लोगों का दिन, घरों में रहे कैद मप्र के पन्ना जिले के पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित ग्राम विक्रमपुर में बाघ ने डेरा जमा लिया

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Panna Tiger Reserve Latest News in madhya pradesh

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पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित ग्राम विक्रमपुर में एक पखवाड़े के अंदर दूसरी बार एक अद्र्ध वयस्क बाघ ने डेरा जमा लिया है। गांव में विशाल सिंह भदोरिया के खेतों में बीती शाम करीब ३-४ बजे लोगों ने बाघ को देखा तो गांव में हड़कंप मच गया। बाघ को जंगल की ओर भगाने में पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम और वन विभाग का पूरा अमला दिनभर लगा रहा।

रेस्क्यू के दौरान हाथियों पर कई बार बाघ ने झपट्टा भी मारा। यहां तक कि उसे भगाने के लिए जब पटाखे फोड़े गए और बैंड बजाए गए तो वह जंगल की ओर भागने के बजाए लोगों की ओर झपटा, जिससे रेस्क्यू टीम के लोग भी दहशत में आ गए। पूरे दिन रेस्क्यू के बाद भी विभाग की टीम बाघ को जंगल की ओर नहीं खदेड़ पाई। जानकारी के अनुसार बाघ ने रविवार शाम करीब ३-४ बजे अरहर के खेतों में पहुंचा और वहीं ठहर गया। मामले की जानकारी लगते ही पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से रेस्क्यू के लिए दो हाथी, आधा दर्जन वाहन और करीब ५० लोगों की टीम को विक्रमपुर की ओर रवाना कर दिया गया था। देर शाम होने के कारण रेस्क्यू सुबह करने का निर्णय लिया गया।

हाथी और रेस्क्यू टीम की ओर झपटा
सुबह जब हाथियों और वाहन की सहायता से बाघ का रेस्क्यू किया जा रहा था तब बताया गया कि बाघ हाथियों की ओर कई बार झपटा। इसके अलावा शाम को जब पटाखे फोड़े जा रहे थे और बैंड बजाए जा रहे थे तब भी वह भागने के बजाए कार्रवाई दल की ओर झपटा था, जिससे कार्रवाई दल के लोग भी सकते में आ गए थे। शाम को ५ से ६ बजे तक बारिश होने के कारण रेस्क्यू में एक घंटे का व्यवधान भी हुआ।

सुबह 4 बजे से शुरू हुआ रेस्क्यू
रात को गांव पहुंची टीम ने सुबह से रेस्क्यू की पूरी तैयारी रात में ही कर ली थी। इसके साथ ही गांव और आसपास के लोगों को अलर्ट कर दिया गया था। बाघ के रेस्क्यू के लिए टीम के पहुंचने के बाद पार्क की टीम, रेंज की टीम और पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। इसके साथ ही लोगों को हिदायत दी गई थी कि अपने-अपने घरों के फाटक और दरवाजे बंद कर लें। घरों के बाहर नहीं निकलें। बंद कमरों में रहें और बच्चों को अकेला नहीं छोड़ें। आसपास के गांव के लोगों को भी समीप के जंगलों में नहीं जाने की हिदायत दी गई थी। बाघ की दहशत के कारण दिनभर लोग घरों में कैद रहे। सुबह 4 बजे दिन निकलने से पूर्व ही हाथियों और वाहनों की सहायता से बाघ की सर्चिंग शुरू कर दी गई। शाम होने तक रेस्क्यू टीम अरहर के खेतों और नालों के बीच बाघ को तलाशती रही।

खेतों में बजाए बैंड और फोड़े पटाखे
खेत में जमे बैठे बाघ को जंगल की ओर खदेडऩे दिनभर के प्रयास विफल होते देख वन अमले की ओर से खेतों में बड़े-बड़े पटाखे फोड़े गए और बैंड बाजे भी बजाए गए। इसके बाद भी बाघ शावक जंगल की ओर नहीं भागा। शाम को अंधेरा होने के बाद टीम की ओर से हाथियों को सुरक्षा की अग्रिम पंक्ति में लगाकर रेस्क्यू को विराम दे दिया गया। रात को वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने गांव में ही डेरा डाले रखा। बताया गया कि मंगलवार सुबह ४ बजे से फिर से बाघ शावक को जंगल में खदेडऩे का प्रयास किया जाएगा।

दो मवेशियों का शिकार
बताया गया कि बाघ ने सुबह गांव के ही प्रेमलाल अहिरवार के एक मवेशी का शिकार किया था। शिकार के बाद वह उसे खा नहीं पाया था। रेस्क्यू दल के लोग शिकार मवेशी को वाहन में लादकर ले गए थे। रेस्क्यू की कार्रवाई के दौरान ही बाघ ने सुंदरलाल अहिरवार के एक और मवेशी का शिकार कर लिया। इस प्रकार एक ही दिन में दो मवेशियों का शिकार किया।

किसानों ने फसल नुकसान का दिया ज्ञापन
गांव के विशाल सिंह भदौरिया के खेत में एक पखवड़े पूर्व भी बाघ घुस गया था। जिसे पूरे दिन रेस्क्यू के बाद जंगल की ओर खदेड़ा गया था। सोमवार फिर बाघ का दिनभर रेस्क्यू चला। इससे करीब १० एकड़ में लगी अरहर की फसल बर्बाद हो गई है। रेस्क्यू के कारण बर्बाद फसल का मुआवजा देने के लिए ग्रामीणों ने दल में आए अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा और मुआवजा दिलाए जाने की मांग की।