
संयुक्त कलेक्ट्रेट, जिला दंडाधिकारी कोर्ट भवन
पन्ना. पन्ना-पहाड़ीखेड़ा मुख्य मार्ग पर स्थित आराजी नंबर 77 की 5.10 एकड़ जमीन को कलेक्टर कोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज करने का आदेश जारी किया है। यह जमीन मुख्य मार्ग से लगी होने के कारण इसकी कीमत करोड़ों में है। आसपास की आराजी के क्रय-विक्रय के मामलों की भी जांच करके प्रकरण कलेक्टर कोर्ट में पेश करने के लिए कहा गया है।
कलेक्टर कोर्ट की जोर से जारी आदेश में बताया गया कि आराजी नंबर 77 वर्ष 1963-64 के रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के रूप में दर्ज थी। इसको बंटन के रूप में आजीविका के पालन के लिए अस्थायी पट्टेदार शिवसहाय खरे को सबसे पहले वर्ष 1970-71 में आवंटित की गई, जिसके बाद तत्कालीन नायब तहसीलदार पन्ना ने उक्त जमीन को अहमद बख्श और जमाल खां के नाम पर दर्ज कर दिया।
यह जमीन मप्र शासन से बंटन से प्राप्त होने के बाद दो अलग-अलग विक्रय पत्रों के माध्यम से अब्दुल सलीम पिता अब्दुल वहीद द्वारा रकबा क्रमांक 0.519 व 1.557 हेक्टेयर जमाल खां और अहमद बख्श से खरीदी गई। उसके बाद छोटे-छोटे प्लॉट के रूप में बेचे जाने के दौरान ही शिकायतें सामने आने के बाद तत्कालीन एसडीएम शेर सिंह मीणा ने के आदेश दिए और नामांतरण पर रोक लगा दी थी। जांच के बाद पन्ना राजस्व मंडल (तहसीलदार, आरआई ,सदर पटवारी व जनकपुर पटवारी ) की संयुक्त टीम द्ध ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को दी थी।
जिला दंडाधिकारी का फैसला
मामले में एसडीएम कोर्ट और कलेक्टर कोर्ट की ओर से संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी संजय कुमार मिश्र ने आरजी क्रमांक 77 रकबा 5.10 (2.063 हेक्टेयर) को सरकारी संपत्ति घोषित करते हुए इसे राजस्व रिकॉर्ड में अंकित करने के आदेश दिए। इसके साथ ही कॉलोनाइजर एक्ट के उल्लंघन और नगर एवं ग्राम निवेश अधिनियम के तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के लिए पन्ना तहसीलदार को अधिकृत किया गया है। तहसीलदार की शिकायत पर मामले में कोतवाली पन्ना में अपराध भी दर्ज कर लिया गया है।
आसपास के जमीनों की भी होगी जांच
मामले की सुनवाई के दौरान जिलादंडाधिकारी के संज्ञान में यह बात लाई गई कि उक्त आराजी के आसपास की सरकारी जमीनों को भी इसी प्रकार से अवैध रूप से लोगों को बेचा जा रहा है। इसे देखते हुए जिलादंडाधिकारी ने आदेश जारी किया है कि उक्त आराजी से लगे अन्य आराजी नंबरए जिनका अवैध रूप से क्रय.विक्रय किया जा रहा है उनकी भी जांच कराकर न्यायालय में प्रथक से जानकारी दें।
प्लॉट खरीदने वालों की बढ़ी परेशानी
कलेक्टर की ओर से जारी आदेश में यह तथ्य सामने आए हैं कि उक्त जमीन 75 छोटे-छोटे टुकड़ों में अलग- अलग नामों से दर्ज है। उक्त टुकड़ों को लोगों ने लाखों रुपए में खरीदी हैं। खरीदे गए भूखंडों पर कई लोगों ने घर भी बनवा लिए है। उक्त जमीन अब राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी घोषित होने के बाद उक्त भू.खंडों को खरीदने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अधिक समस्या उन्हीं लोगों को होनी हैं जिन्होंने अपने जीवनभर की जमा पूजी व सेवानिवृत्ति में मिली राशि से उक्त भू खंडों को खरीदा और उनमें घर भी बनवा लिए।
Published on:
13 Jan 2023 10:29 pm
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