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राम सीय सिर सेंदुर देहीं, सोभा कही न जाति बिधि केहीं

देर रात हुआ कन्यादान, दोपहर १२ बजे के बाद भी चलती रही पॉव पखरी-कुंवर कलेवा के बाद निभाई गई विदाई की रश्म, सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु रहे शामिल

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shriram vivah

देर रात हुआ कन्यादान, दोपहर १२ बजे के बाद भी चलती रही पॉव पखरी

पन्ना. नगर के श्रीराम जानकी मंदिर में चल रहे विवाह उत्सव में सोमवार की रात की देर रात कन्यादान की रश्म निभाई गई। इस अवसर पर मंदिर परिसर में मौजूद सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने विवाह के गीत गाये। इसके बाद पॉव पखरी का कार्यक्रम शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। दूसरे दिन मंगलवार को सुबह से फिर पॉव पखरी का क्रम शुरू हुआ जो दोपहर १२ बजे के बाद भी चला।


सोमवार की शाम को गाजे-बाजे के साथ नगर में श्रीरामजी की बारात निकाली गई थी। बारात के नगर भ्रमण करने के बाद मंदिर में भगवान के टीका की रश्म मंदिर के प्रवेश द्वार पर निभाई गई। महिलाओं ने कलश जलाकर बारात की अगवानी की। मंदिर परसिर में विवाह के लिए डाले गए मंडप में भगवान की प्रतिमाओं को स्थापित करने के बाद पंडि़तों द्वारा देवी सीता के कन्यादान की रश्म निभाई गई। कन्यादान रात करीब साढे १० बजे पूरा होने के बाद पॉव पखराई का क्रम शुरू हुआ। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने देर रात तक भगवान श्रीराम के पॉव पखारे और आर्शीवाद लिया।


सुबह से फिर शुरू हुई पॉवपखरी
रात को जो श्रद्धालुं पॉव पखारने से रह गए थे वे सुबह से ही श्रीराम जानकी मंदिर पहुचे और पांव पखारे। यह क्रम दोपहर १२ बजे के बाद भी चलता रहा। इस अवसर पर मौजूद सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने विवाह गीत गाए। दोपहर में कुंवर कलेवा की रश्म निभाई गई। इसके बाद बैंड बाजों के बीच में विदाई का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर महिलाओं ने विदाई गीत भी गाये। सुबह से विदाई के बाद तक मंदिर परिसर में मेले जैसे हालात रहे। जहां देखो वहीं श्रद्धालुओं की भीड़ ही भीड़ दिखाई दे रही थी। आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में भारी संख्या में पुलिसबल तैनात रहा।


मंडप और हल्दी तेज से हुई थी शुरुआत
नगर के श्रीराम जानकी मंदिर में परंपरागत रूप से हर साल आयोजित होने वाले विवाह पंचमी कार्यक्रम की शुरुआत रविवार की देर रात मंडप डलने और भगवान को हल्दी-तेल चढ़ाने और पंडप के साथ हुई थी। एक दिन पूर्व सोमवार को गाजे-बाजे के साथ भगवान की बारात शोभायात्रा निकाली गई। नगर के लोगों ने जगह-जगह भगवान की आरती उतारकर विशेष पूजा-अर्चना की। बारात में शामिल लोगों का भी जगह-जगह स्वागत हुआ। महिलाओं ने कलश जलाकर मंदिर में बारात की अगवानी की और विवाह गीतों के बीच भगवान का टीका हुआ।