23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाघ टी-7 टेरिटोरियल फाइट में जिंदगी हारा

- दूसरे बाघ के घायल होने की आशंका के चलते उसकी तलाश जारी

2 min read
Google source verification
tiger.png

,,

पन्ना टाइगर रिजर्व में दो बाघों के बीच हुई टेरिटोरियल फाइट में बुर्जुग बाघ टी-7 अकोला बफर क्षेत्र में मृत पाया गया। इसे 2015 में भोपाल से लाया गया था। इसने टाइगर रिजर्व में बाघों की वंश वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाघ की उम्र करीब 14-15 साल थी। पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया। दूसरे बाघ के घायल होने की आशंका के चलते उसकी तलाश जारी है।

ज्ञात हो कि अभी कुछ समय पहले ही कूनो में मादा चीता की दक्षा की मौत हो गई थी। इसके बाद जो जानकारी सामने आई थी उसके अनुसार मादा चीता दक्षा पर जो घाव पाए गए, वो पहली नजर में नर चीते के हमले के हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मेटिंग के दौरान चीतों के बीच हिंसक व्यवहार सामान्य है।

सफेद बाधिन विंध्या ने दम तोड़ दिया- जबकि मई 2023 में ही रीवा में मुकुंदपुर सफारी की पहली सफेद बाधिन विंध्या ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। वह कई दिनों से बीमार चल रही थी। इस वजह से उसके खान-पान पर भी असर पड़ रहा था। 21 जुलाई 2007 को दिल्ली जू में जन्मी विंध्या को नवंबर 2015 को महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव व्हाइट टाइगर सफारी लाया गया था। यहां उसने 15 वर्ष और 8 महीने की उम्र पूरी की। मौत के बाद निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार चिडियाघर परिसर में उसका अंतिम संस्कार किया गया। विंध्या बाघिन लोगों की भावनाओं से जुड़ी हुई थी।

विंध्य के लिए गौरव है सफेद बाघ
सफेद बाघ विंध्य की पहचान का बड़ा प्रतीक हैं। सबसे पहले यहीं सीधी जिले के जंगल में रीवा रियासत के पूर्व महाराजा मार्तंड सिंह ने 27 मई 1951 को शिकार के दौरान सफेद शावक पकड़वाया था।

उसे गोविंदगढ़ (रीवा) में किला परिसर में ही रखा गया था। उस बाघ का नाम मोहन रखा गया था। वहीं पर कई बाघिन के साथ संसर्ग के बाद सफेद शावकों के जन्म हुए और देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही कई देशों को भी सौंपे गए थे। कहा जाता है कि वर्तमान में जहां भी सफेद बाघ हैं, वह रीवा से भेजे गए बाघों के ही वंशज हैं। यह दुनिया की इकलौती ह्वाइट टाइगर सफारी है।

पहली सफेद बाघिन विंध्या तो शांत स्वभाव की थी, कई बार सड़क के किनारे वाहन के नजदीक आ आती थी, ऐसे में गाड़ी के भीतर से लोग तस्वीरें भी खींचते लेते थे। वहीं इसके केयर टेकर अलग-अलग स्थानों से प्रशिक्षण लेकर आए थे, वह ठीक से देखभाल कर रहे थे।

जानकारों का कहना है कि जंगल में इनके पैदा होने की संभावना दस हजार में एक के होने की मानी जाती है। कई अध्ययन भी हुए हैं जिसमें पता चला है कि जंगलों में सफेद बाघ नहीं हैं। वहीं चिडियाघर के बाड़ों में रखे गए बाघों की बात करें तो उनकी भी केयर टेकर के साथ अच्छी तालमेल बैठने पर भोजन की टाइमिंग या फिर नाइट हाउस के नजदीक केयर टेकर को देखकर वह स्वयं ही पहुंच जाते हैं।