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पन्ना में गंभीर अपराधों के 78 फीसदी आरोपियों को मिली सजा, ये नीति बन रही सफलता का कारण

चिह्नित प्रकरणों की नीति बन रही सफलता का बड़ा कारण, मई में 6 को और जून में 8 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

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Panna district court case status in madhya pradesh

Panna district court case status in madhya pradesh

पन्ना। जिले में होने वाले गंभीर और सनसनीखेज अपराधों को चिह्नित कर लगातार मॉनीटरिंग के कारण गंभीर अपराधों के मामलों में आरोपियों को सजा मिलने के मामलों में वृद्धि हुई है। गंभीर अपराधों के मामलों में जिले में 78 फीसदी तक आरोपियों को सजा हो रही है, जबकि प्रदेश में यह दर करीब 80 फीदसी है। नई रणनीति के तहत आरोपियों को सजा दिलाने में लोक अभियोजन सफल हो रहे हैं।

सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया, जिले में मई में 6 आरोपियों को और जून में 8 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। पूरे जिले में चिह्नित जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरणों में सजा का प्रतिशत जिले में 78 प्रतिशत रहा।

सजा मिलने का यह है कारण
उन्होंने बताया, प्रदेश में वर्ष 2008 से जघन्य व सनसनीखेज प्रकरणों को चिह्नित कर उनकी विवेचना एवं न्यायालय के समक्ष सशक्त पैरवी की नीति लागू की गई थी। जिले में भी इसी नीति के तहत काम चल रहा है। इसके तहत गंभीर अपराधों को चिह्नित कर उनमें शीघ्र विवेचना की कार्रवाई की जा रही है। जिला स्तर पर कलेक्टर, एसपी व उपसंचालक अभियोजन द्वारा व प्रदेश स्तर पर प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक एवं संचालक लोक अभियोजन द्वारा मॉनीटरिंग की जाती है। राज्य शासन ने चिह्नित प्रकरणों के सक्षम पैरवी के लिए उपसंचालक अभियोजन और जिला अभियोजन अधिकारी स्तर के अधिकारियों को तैनात किया है। उन्होंने कहा, जघन्य प्रकरणों में सफलता का मुख्य कारण स्तरीय अनुसंधान और अभियोजन अधिकारियों द्वारा की जा रही सशक्त पैरवी है।

यह है प्रदेश का औसत
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी द्विवेदी ने बताया, हत्या डकैती, बलात्कार के चिह्नित अपराधों में प्रदेश में दोष सिद्ध का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। चिह्नित अपराधों में वर्ष 2016 में दोषसिद्ध का प्रतिशत 67 था। वर्ष 2017 में 71.18 हो गया। मई 2018 में यह बढ़कर 80 प्रतिशत हो चुका है। अकेले मई 2018 में ही 2 प्रकरणों इंदौर के थाना सराफा मामले में आरोपी नवीन उर्फ अजय एवं जिला धार के थाना मनावर के मामले में आरोपी करण उर्फ फितया को मृत्युदंड की सजा एवं 38 प्रकरणों में आजीवन कारावास की सजा हुई है। महानिदेशक अभियोजन राजेन्द्र कुमार ने अभियोजन अधिकारियों को अच्छा कार्य करने के लिए लगातार प्रोत्साहित करने की बात कही है।