
panna district sabji mandi
पन्ना। प्रदेश के सबसे पिछड़े जिले में शामिल पन्ना को जहां आधुनिक सुविधाओं की दरकार है, वहीं किसानों के लिए सब्जी व फल मंडी नहीं होने से परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों को फल और सब्जियों का सही रेट नहीं मिल पा रहा। आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लोग फल व औषधियों को इकट्ठा करते हैं, पर मंडी व औषधियों का विपणन केन्द्र नहीं होने के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहां लगने वाले बाजार में उत्पादकों को फल और सब्जियां औने-पौने रेट में बेचना पड़ रहा है।
ग्रामीण अंचल से सब्जी लेकर आने वाले किसानों को सब्जी बेचने जगह नहीं मिल पाती है। वे कम कीमत पर दुकानदारों को सब्जियां बेचने को मजबूर रहते हैं। शहर में सब्जी की चंद दुकानें होने के कारण आम जनता को मनमानी कीमतों पर बेची जाती है। हालात यह होती है कि जो हरी सब्जी इतवारी बाजार में 10 रुपए प्रति किग्रा मिल रही होती है, वहीं दूसरे दिन दुकानदारों के यहां 15 से 20 रुपए हो जाती है।
वर्षों से सब्जी मंडी की मांग
गौरतलब है कि शहर में सब्जी मंडी की मांग वर्षों से की जा रही है, पर नगर पालिका अभी तक शहर के अंदर स्थान चिह्नित नहीं कर सका है। लोग सब्जी के लिए छत्रसाल पार्क के आसपास लगने वाली इतवारी बाजार और इंद्रपुरी में लगने वाल साप्ताहिक बाजार पर निर्भर हैं। सब्जियों को दोगुने दाम पर बेचकर दुकानदार अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। सब्जी उत्पादक किसानों के लिए नगर में कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की गई है जहां बैठकर वे अपनी सब्जियां बेच सकें।
साप्ताहिक बाजार का रहता है इंतजार
साप्ताहिक बाजार में उत्पादों की बिक्री करने आए किसानों से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि यहां मंडी नहीं होने से रोजना सब्जियों को बिक्री नहीं हो पाती है। सब्जियों की फसल तैयार होने पर सप्ताह में तीन से चार दिन की बाजार में लाई जा सकती है। जिले के जनप्रतिनिधियों के सुस्त रवैए से अब तक जिला प्रदेश के अन्य जिलों से पिछड़ा है।
Published on:
22 Feb 2018 03:06 pm
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