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वनकर्मियों की हड़ताल से आफत में बाघों की जान, बाघों की सुरक्षा पर खड़ा हुआ संकट

प्रशासन असमंजस में: दक्षिण वन मंडल के मोहंद्रा रेंज में एक माह से भी अधिक समय से बनी है दो बाघों की मूवमेंट

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All India Tiger Estimation -2018

All India Tiger Estimation -2018

पन्ना। मप्र रेंजर एसोसिएशन और मप्र वन कमचारी संघ के संयुक्त तत्वावधान में जिले के एक हजार से अधिक वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ५ मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। इस हड़ताल के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर जोन के अलावा बफर जोन और रेगुरल फॉरेस्ट में घूम में रहे बाघों की सुरक्षा पर संकट आ गया है। वन रक्षक से रेंजर तक हड़ताल पर होने की स्थिति में बाघों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित अमला मौजूद नहीं होगा। ऐसे हालात में स्वच्छंद रूप से असुरक्षित वनों में घूम रहे बाघों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की कुल संख्या ३५ से ४० के बीच बताई जाती है। इनमें बीते साल जो ११ शावक थे वे अब अर्ध वयस्क बाघ व बाघिन बन चुके हैं। ऐसे हालात में अपने टेरीटरी के लिए उपयुक्त वन क्षेत्र का चयन करने के लिए लगातार कोर जोन से निकलकर बफर जोन और उत्तर व दक्षिण वन मंडल के विभिन्न रेंजों में घूम रहे हैं। दो साल पूर्व एक बाघिन यहां से निकलकर सतना जिले के में एक बाघ के साथ निवास कर रही है, जबकि एक बाघिन के लगातार अमानगंज रेंज के विक्रमपुर द्वारी आदि क्षेत्रों में मूव करने के कारण उसे बीते महीनों ट्रेंकुलाइज करके संजय धुबरी टाइगर रिजर्व छोड़ दिया गया है, जबकि दो बाघ दक्षिण वन मंडल के मोहंद्रा रेंज में बीते कई दिनों से देखे जा रहे हैं। जिनकी लगातार निगरानी वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा की जा रही थी। इसके अलावा कई बाघ दमोह, कटनी जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में घूम रहे हैं। वन विभाग के मैदानी अमले के हड़ताल पर जाने से इन बाघों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ऐसे हालात में शिकारियों के भी सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।
19 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
रेंजर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार ने बताया, मप्र रेंजर एसोसिएशन एवं मप्र वन कर्मचारी संघ के संयुक्त आह्वान पर 19 सूत्रीय मांगों के लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल डायमंड चौराहा जगात चौकी में शुरू होने जा रही। जिसमें दक्षिण वनमंडल पन्ना, उत्तर वनमंडल पन्ना एवं पन्ना टाइगर रिजर्व पन्ना के १6 रेंजर, 27 डिप्टी रेंजर, 91 वनपाल, 410 वनरक्षक के अतिरिक्त 469 स्थायीकर्मी कुल 1013 अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। सभी लोगों ने अपने-अपने शस्त्र भी विभाग में जमा करा दिए हैं। उन्होंने बताया 19 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। प्रमुख मांगों में जिले के अंतर्गत कम वेतन पा रहे वन कर्मचारी एवं अधिकारी शासन से न्याय उचित वेतन भत्ता दिए जाने, स्वास्थ्य सुविधा एवं 8 घटे की ड्यूटी के साथ-साथ उनके कर्तव्य क्षेत्र में होने वाली वनोपज हानि की वसूली रोकने के लिए अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे।
30 हजार कर्मचारी हड़ताल पर
रेंजर ऐसोसिएशन के संभागीय एवं जिला अध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार वन परिक्षेत्राधिकारी पवई एवं वन कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष महीप रावत ने बताया रेंजर को पुलिस के टीआई, डिप्टी रेंजर को पुलिस के एसआई एवं वनरक्षक को पुलिस के हेड कॉन्सटेबल के बराबर वेतन मिलना चाहिए, लेकिन शासन ने उनकी वेतन विसंगति को 2007 के बाद यथावत रखा है। जिससे वन कर्मचारी एवं अधिकारी रात दिन 24 घंटे तपी गर्मी, बरसात एवं ठंड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी वेतन विसंगति को दूर नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया मांगें पूरी नहीं होने तक मप्र का समस्त वन अमला लगभग 30 हजार कर्मचारी एवं अधिकारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे।
वैकल्पक व्यवस्था के लिए नहीं पर्याप्त संसाधन
वन विभाग के इतने बड़े अमले के एक साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से बाघों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पुलिस विभाग और वन समितियों के लोगों की सहायता लेने की बात की जा रही है, लेकिन पुलिस के पास पहले से ही इतने काम होते हैं कि वह जंगल में बाघों की सुरक्षा कैसे करेगी। घने जंगलों में बाघ जैसे हिंसक वन्य प्राणी की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी प्रशिक्षित नहीं हैं।
अनहोनी की आशंका
इससे अनहोनी की आशंका बनी रह सकती है। इसके अलावा वन सामितियों के लोग भी तकनीकी रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि वे बाघ जैसे महत्वपूण वन्य प्राणी की सुरक्षा पूरी जिम्मेदारी के साथ कर सकें। इसके अलावा इनका इनका संख्या बल भी उतना नहीं है जितने लोग आंदोलन पर जा रहे हैं। इस हड़ताल से निश्चित ही बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर सवाल तो उठा ही है साथ ही उनके जीवन पर भी संकट मंडराने लगा है।

दक्षिण वन मंडल क्षेत्र के रेगुरल फारेस्ट में घूम रहे बाघों की सुरक्षा के लिए कलेक्टर और एसपी को लिखा गया है। बाघों की निगरानी में पुलिस का सहयोग लिया जाएगा। वन सुरक्षा समितियों के लोगों को भी बाघों और दूसरे वन्य प्राणियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
मीना मिश्रा, डीएफओ दक्षिण वन मंडल पन्ना