
Story of Cattle in panna madhya pradesh
पन्ना। जिले में आवारा मवेशियों के चलते हादसे तो हमेशा होते हैं, लेकिन अब इनके कारण लोगों को अपने जीवन से भी हाथ धोना पड़ रहा है। इसके बाद भी शहर की सड़कों और गलियों में आवारा मवेशियों की समस्या हल होने का नाम नहीं ले रही है। जिला मुख्यालय में बायपास पर संचालित एक मात्र गोसदन उद्घाटन के बाद एक-डेढ़ माह ही चल सका था। उसके बाद होने के बाद समस्या पूर्ववत बनी हुई है।
बैल ने पेट में सींग मार दिया
बीते दिनों पन्ना-कटनी राजमार्ग पर झलाई मोड़ के पास एक प्रौढ़ राकेश सिंह महदेले पिता गंगा निवासी बेनीसागर मोहल्ला को एक बैल ने पेट में सींग मार दिया था, जिन्हें उपचार के लिए जबलपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से उन्हें गंभीर हालत में नागपुर ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। आवारा मवेशी के हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई पर इसकी किसी को परवाह नहीं।
मामले में किसी प्रकार की गंभीरता नहीं
एक व्यक्ति मवेशी के हमले में मर गया और प्रशासन के कानों में जू तक नहीं रेंगी। यहां तक कि कलेक्टर और एसपी ने भी मामले में किसी प्रकार की गंभीरता नहीं दिखाई। हादसे के बाद अब मवेशियों को देखकर लोग डरने लगे हैं। लोगों को लगता है कि ऐसा न हो कि कहीं मवेशी फिर से किसी पर हमला कर दें।
कस्बों में वाहन चालक परेशान
जिला मुख्यालय ही नहीं आवारा मवेशी जिलेभर में समस्या बने हुए हैं। एक समय मवेशी पशुधन कहलाते थे। लोग जेवर और गृहस्थी का सामान बेचकर मवेशी खरीदते थे, क्योंकि वे खेती में काम आते थे। अब खेती के मशीनीकरण के कारण मवेशी अनुपयोगी हो गए हैं। इससे पालक इन्हें तभी तक अपने घरों में बांधकर रखते हैं जब तक ये दूध देते हैं। इसके बाद इन्हें शहर की गलियों और गांवों के खेतों में आवारा घूमने के लिए छोड़ दिया जाता है।
गांवों में किसान परेशान
जिससे अब हालत यह है कि इन आवारा मवेशियों के कारण जहां एक ओर शहर और कस्बों में राहगीर परेशान हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर गांवों में किसान परेशान हैं। रातों को खेतों में घुसने वाले मवेशी फसलें चौपट कर रहे हैं। किसानों को रात-रातभर जागकर मवेशियों से खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। ग्रामीणों द्वारा कई बार मवेशियों को जंगल की ओर भी खदेड़ा गया है, लेकिन यह समस्या अभी तक हल नहीं हो सकी है।
लगाए थे रेडियम
जिले के ज्यादातर क्षेत्रों में बीते महीने आवारा घूम रहे मवेशियों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए सींगों पर रेडियम की पट्टी लगाई गई थी, लेकिन दो-चार दिन बाद ही यह योजना सुस्त हो गई। साथ ही मवेशियों के सींगों में लगाई गई रेडियम पट्टी भी हफ्ते-दो हफ्ते ही चल पाई। इसके कारण अब पूरे शहर में जहां देखो वहीं आवारा मवेशी आसानी से घूमते हुए दिख जाते हैं।
सब्जी दुकानों के आसपास ज्यादा समस्या
शहर में लगने वाली सब्जी दुकानों के आसपास मवेशियों की संख्या ज्यादा रहती है। शहर के मेन मार्केट में भी मवेशी मनमाने स्थान पर घूमते नजर आते हैं। दुकानदारों द्वारा इन्हें एकदम से भगाने के कारण अकसर हादसे हो जाते हैं। जिससे राहगीर और सामने से आ रहे वाहन चालकों को इनका शिकार होना पड़ता है।
गोपाल पुरस्कार के नहीं मिले सार्थक परिणाम
दूध देने वाले पशुओं की देसी नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश शासन की ओर से बीते कई वर्षों से गोपाल पुरस्कार योजना चलाई जा रही है। इसके तहत अधिकतम दूध देने वाले मवेशियों के पालकों को ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। इसके बाद भी पालकों में सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिल रहे हैं।
महीनों से बंद गोशाला
जिला मुख्यालय में बायपास पर नगर पलिका परिषद की ओर से लाखों रुपए खर्च करके गोसदन बनाया गया था। जो उद्घाटन के बाद करीब एक माह ही चल सका और अब बंद पड़ा है। इससे शहर में समस्या यथावत है।
Published on:
26 Dec 2017 02:21 pm
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