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mp news: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ में विश्वकर्मा परिवार ने ईंधन संकट के बीच परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से बैलगाड़ियों पर बारात निकाली जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। विश्वकर्मा परिवार की ये अनोखी बारात जिले में चर्चाओं का विषय बनी हुई है। आधुनिक दौर में जहां शादियों में लग्जरी कारों और महंगे काफिलों का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं अजयगढ़ के विश्वकर्मा परिवार ने परंपरा को जीवित रखने बैलगाड़ियों पर बारात निकालकर सभी को हैरान कर दिया।
नए बस स्टैंड के पास अजयगढ़ निवासी रामखिलावन विश्वकर्मा ने अपने छोटे बेटे कृष्ण गोपाल विश्वकर्मा का विवाह बांदा उत्तर प्रदेश की रहने वाली अंशिका विश्वकर्मा पिता कामता प्रसाद विश्वकर्मा के साथ मंगलवार-बुधवार की रात हुआ। वैवाहिक कार्यक्रम कृष्णा मैरिज गार्डन किशनपुर अजयगढ़ में हुआ। वधु पक्ष के लोग पहले ही कृष्णा मैरिज गार्डन पहुंच गए थे। कृष्णा की बारात नये बस स्टैंड अजयगढ़ से किशनपुर स्थित मैरिज गार्डन के लिए 30 बैलगाड़ियों में निकली। जिसने भी बैलगाड़ियों में सवार बारात को देखा उत्सुक हो उठा। अनोखी पहल को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और इस अनूठे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
इस अनोखी बारात को खास बनाने के लिए अजयगढ़ जनपद क्षेत्र के विभिन्न गांवों—बीरा, लोलास, शाहपुरा, गड़रियन पुरवा और मझपुरवा से करीब 30 बैलगाड़ियां मंगवाई गई थीं। बुधवार 11 मार्च की रात करीब साढ़े 11 बजे जब बैलों के गले में बंधी घंटियों की मधुर आवाज के साथ बारात निकली तो पूरा इलाका पुराने समय की यादों में खो गया। बारात में केवल बैलगाड़ियां ही नहीं, बल्कि आधा दर्जन नाचते हुए घोड़े और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने माहौल को और भी भव्य बना दिया। इस अनोखी बारात को देखने के लिए सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
रामखिलावन विश्वकर्मा ने बताया कि इस पहल के पीछे उनकी सोच केवल अलग शादी करने की नहीं थी, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश देना भी था। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं, जबकि हमारी पुरानी पद्धतियां न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों का संकट बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में हमें अपनी पारंपरिक और किफायती व्यवस्थाओं को भी याद रखना चाहिए। अजयगढ़ की यह अनोखी बारात अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच परंपरा, सादगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है।
Updated on:
12 Mar 2026, 7:14 PM IST
Published on:
12 Mar 2026, 7:14 PM IST
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