
Theft of rare images of Lord Brahma
रविशंकर सोनी @ पवई। नगर के नवीन तहसील भवन के पीछे स्थित पत्थर छाई संन्यासी बाबा स्थान से बीते दिनों हजारों साल पुरानी भगवान ब्रह्मा की दुर्लभ मूर्ति चोरी हो गई है। जिसका अभी तक कहीं पता नहीं चला है, साथ ही चोरी के इस मामले की कहीं शिकायत तक किसी ने दर्ज नहीं कराई है, जिससे करोड़ों रुपए के कीमत वाली इस प्रतिमा के चोरी जाने की भनक तक किसी को नहीं लग पाई है।
नन्ही पवई निवासी चंद्रभान नगायच ने बताया कि पूर्व में यह स्थान नगायच परिवार का निवास स्थान हुआ करता था। यहां सृष्टि के आधार त्रिदेवों में से एक ब्रह्माजी की दुर्लभतम मूर्ति सहित अन्य कई मूर्तियों लगी हुई थीं। परिवार बढऩे से धीरे-धीरे लोग यहां से अलग रहने लगे, जिससे यह स्थान खंडहर में तब्दील हो गया। धीरे-धीरे यहां दीवारों में लगे नक्काशीदार पत्थर और मूर्तियां चोरी होने लगीं।
मामले की शिकायत तक नहीं
यहां लोगों का आना-जाना कम हो जाने से चोरी होने की जानकारी भी नहीं लग पा रही थी। इसी तरह बीते दिनों लोगों ने देखा कि यहां एक दीवार में लगी भगवान ब्रह्माजी की की मूर्ति को भी अज्ञात चोरों ने निकाल लिया है, जिस स्थान से मूर्ति को निकाला गया है वहां पर दीवार में छेद भी हो गया है। मूर्ति चोरी होने की जानकारी किसी को नहीं लग पाने के कारण मामले की शिकायत तक नहीं दी है।
पूर्व में भी चोरी हुईं कई मूर्तियां
नगायच परिवार के ही संजय नगायच ने बताया कि उक्त स्थान के खंडहर में तब्दील होने के बाद से यहां से कई मूर्तियां चोरी हो चुकी हैं। उक्त स्थान पर समुचित रखरखाव नहीं हो पाने के कारण लगातार बेशकीमती मूर्तियां चोरी हो रही हैं। देशभर में ब्रह्माजी के बहुत ही कम मंदिर और प्रतिमाएं पाए जाते हैं। ऐसे हालात में ब्रह्माजी की प्रतिमा का यहां होना अपने आप में विशेष हो जाता है।
मार्केट में करोड़ों रुपए कीमत
ऐसी दुर्लभतम और हजारों साल प्राचीन प्रतिमाओं की कीमत तो मार्केट में करोड़ों रुपए में होती है। इसके बाद भी जगह-जगह बिखरी पड़ी पुरा संपदा का समुचित रखरखाव नहीं हो पा रहा है। बताया गया कि ब्रह्माजी के प्रतिमा के चोरी जाने की जानकारी चार दिन पहले ही लगी है। हालांकि अभी तक प्रतिमा चोरी जाने की कहीं शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। बताया गया कि भगवान ब्रह्मा की करीब ढाई फीट की प्रतिमा दीवार में चुनी हुई थी। प्रतिमा की मोटाई एक से डेढ़ फीट की थी।
चौमुखा में खुले आसमान तले शिव की चर्तुमुखी प्रतिमा
पवई से लगभग 15 किमी. दूर ग्राम चौमुखा में करीब हजार साल पुरानी भगवान शिव की चार मुख वाली दुर्लभ शिव-लिंग उपेक्षा की वजह से खुले आसमान के नीचे है। गांव के लोगों ने बताया, वसंत पंचमी पर यहां मेला भी लगता है। यहां आज तक पीने के पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। प्राचीन शिव-लिंग होने के यहां पूजा-अर्चना करने सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। मदिर के आस पास और भी पुरा संपदा बिखरी पड़ी है। पवई नगर सहित आसपास ऐसे अनेक स्थान हैं जहां चंदेल कालीन धरोहर को सहेजने वाला कोई नही है।
Published on:
17 Jun 2018 02:13 pm
बड़ी खबरें
View Allपन्ना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
