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पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर जोन में भी खतरे में है टाइगर

मप्र के पन्ना जिले में शिकारियों ने पन्ना टाइगर रिजर्व की कोनी बीट में बाघिन का शिकार किया है।

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Panna TIger reserve

Panna TIger reserve

पन्ना. जिन शिकारियों ने पन्ना टाइगर रिजर्व की कोनी बीट में बाघिन का शिकार किया है, उनके बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे शहडोल के जंगल और पेंच टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार में शामिल होने की आशंका है। बीते कुछ माह में जिस तरह से प्रदेश के टाइगर रिजर्वों में लगातार बाघों के शिकार हो रहे हैं उससे आशंका है कि बाघों के शिकार में कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है। इसे देखते हुए पन्ना में बाघिन के शिकार और तरीके व स्थान चयन से संबंधित जानकारी एनटीसीए को भेजी है।

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे का कहना है कि बाघ का शिकारी हर कोई नहीं हो सकता है। कुछ गिने-चुने और एक्सपर्ट ही शिकार कर सकते हैं। ऐसे हालात में संभव है कि जिन लोगों ने पन्ना में क्लच वायर से बाघिन का शिकार किया उन्हीं ने बाधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लगे शहडोल के जंगल में हुई तीन बाघों के शिकार की वारदात को अंजाम दिया हो। हाल में पेंच टाइगर रिजर्व क्षेत्र में भी बाघ के शिकार की भी वारदात सामने आई है।

गांवों के आसपास घूम रहे बाघों की सुरक्षा कैसे हो

गौरतलब है कि प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में शहडोल जिले के घुनघुटी सहित आासपास के जंगलों में जो तीन बाघों का शिकार हुआ है उनमें से सभी बाघ गांवों के आसपास घूम रहे थे। इसी तरह से पेंच टाइगर रिजर्व में जिन बाघों का शिकार हुआ वह भी गांवों के आसपास घूमते हुए बताए गए हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में कोनी बीट में जिस बाघिन पी-521 के शिकार की वारदात को अंजाम दिया गया है वह स्थल भी ग्राम कोहनी से महज ढाई से तीन किमी. की दूरी पर था। इससे आशंका जताई जा रही है कि शिकार वारदात को अंजाम देने से पूर्व शिकारी जंगल से लगे गांवों में शरण लेते होंगे।

मृत बाघ की कीमत भी होती है करोड़ों में

वाइल्ड लाइफ से जुड़े लोगों के अनुसार जिन लोगों द्वारा बाघ का शिकार किया जाता है उन्हें 10-20 हजार रुपए ही मिलते हैं, लेकिन जब उसकी खाल, मांस और हड्डियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पहुंचते हैं तो उनकी कीमत करोड़ों में हो जाती है। एक बड़े बाघ के खाल की कीमत ही 10-15 लाख से शुरू होती।

वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे का कहना है कि पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन का पूरा ध्यान पर्यटन को बढ़ावा देने पर है। इससे बाघों की सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बाघ के शिकारी आम लोग नहीं होते हैं। इससे यहां के बाघों के शिकार का बांधवगढ़ और पेेंच में हुए शिकार से कनेक्शन हो सकता है। इसी कारण पूरे मामले की जाकनारी एनटीसीए को भेजी गई है।

एनटीसीए प्रतिनिधि राजेश दीक्षित के अनुसारप्रदेश के टाइगर रिजर्वों में लगातार हो रहे शिकार की वारदतों को लेकर प्रदेश शासन को सचेत हो जाना चाहिए। किसी बड़े शिकारी गिरोह के सक्रिय होने की भी आशंका है। शासन को बड़े स्तर की किसी जांच एजेंसी से जांच कराए जाने की जरूरत है।

घर में घुसकर बाघ ने किया हमला

जिले के अमानगंज वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत बांधीकला के ग्राम झिन्ना में घर की परछी में सो रहे एक आदिवासी के घर में घुसकर बीती रात बाघ ने हमला कर दिया। जिससे ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल को वन विभाग अमानगंज की ओर से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घायल मिजाजीलाल आदिवासी ने बताया, वह बीती रात घर की परछी में सो रहा था, इसी दौरान अचानक अंधेरे में बाघ ने उस पर हमला कर दिया। रजाई ओढ़े होने के कारण उसके शरीर पर ज्यदा चोट नहीं आई। चेहरे पर जरूर गंभीर चोट है। घटना की जानकारी सुबह लोगों द्वारा वन विभाग को दी गई। मामले की जानकारी लगने के बाद वन विभाग का अमला गांव पहुंचा और पीडि़त को अमानगंज अस्पताल लाया गया। जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।