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Ken Betwa Link Project: आमरण अनशन से बिगड़ी तबीयत, पन्ना में आदिवासी महिलाओं ने बताई अपनी पीड़ा

Ken Betwa Compensation Dispute: केन-बेतवा मुआवजा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 'चिता आंदोलन' और आमरण अनशन आज भी चल रहा है। जानिए आंदोलनकारियों ने क्या कहा...।
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Ken Betwa Link Project, Chita Andolan

Ken Betwa Compensation Dispute केन-बेतवा मुआवजा विवाद (source: patrika)

Ken Betwa Link Project: केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांय और रूंझ परियोजनाओं से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहा 'चिता आंदोलन' रविवार को दसवें दिन भी जारी है। वहीं संगठन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन भी चल रहा है। प्रदर्शन के दौरान कई आदिवासी महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा साझा की।

आंदोलनकारियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन अब कई चरणों में चल रहा है। मिट्टी, जल और फांसी सत्याग्रह भी साथ-साथ चल रहे हैं। उनका कहना है कि विपरीत मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार आंदोलन में शामिल होकर अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

नियमों की अनदेखी करने का आरोप

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर ने प्रशासन पर भू-अर्जन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने भू-अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013 की धारा 38(1) एवं 38(2) का हवाला देते हुए कहा, प्रभावित परिवारों को पूर्ण मुआवजा दिए बिना भूमि अधिग्रहण और मकानों को तोड़ना कानून के विरुद्ध है।

प्रशासन का यह रवैया असंवेदनशीलता को दर्शाता है

अमित भटनागर का कहना है कि यदि सरकार स्वयं कानून का पालन नहीं करेगी तो आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाएंगे। आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि आमरण अनशन के छह दिन पूरे होने के बावजूद अमित भटनागर का नियमित चिकित्सकीय परीक्षण नहीं कराया गया। प्रशासन का यह रवैया असंवेदनशीलता को दर्शाता है। आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों ने मांग की, अनशनकारी के स्वास्थ्य की तत्काल चिकित्सकीय जांच कराई जाए।

आदिवासी महिलाओं ने साझा की अपनी पीड़ा

प्रदर्शन के दौरान कई आदिवासी महिलाओं ने भी अपनी पीड़ा साझा की। कहा, बिना पर्याप्त मुआवजा और पूर्व सूचना के उनके मकान गिरा दिए गए तथा जमीन अधिग्रहित कर ली गई। कुछ महिलाओं ने यह भी दावा किया कि उन्हें घर का सामान तक निकालने का अवसर नहीं दिया गया। आंदोलन में शामिल महिलाओं ने पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की।

विभिन्न सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिल रहा है। आमरण अनशन के साथ-साथ कई महिला और पुरुष प्रभावित परिवारों के सदस्य क्रमिक अनशन पर भी बैठे हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सभी विस्थापित परिवारों को उचित मुआवजा, वैधानिक अधिकार और कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।