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पन्ना में कुपोषण का दंश : ढाई साल की बच्ची की मौत

कुपोषण की स्थिति गंभीर होने के बाद भी जिम्मेदार लापरवाह, शाहनगर से रेफर के बाद कटनी के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

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पन्ना

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Rajiv Jain

Sep 29, 2017

Two and half year girl died from Malnutrition in Panna Madhya pradesh

Two and half year girl died from Malnutrition in Panna Madhya pradesh

शाहनगर (पन्ना). जनपद क्षेत्र के ग्राम कचौरी में कुपोषण से पीडि़त एक ढाई साल की बच्ची की कटनी के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। बच्ची को शाहनगर के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था। जहां उसकी हालत गंभीर होने पर कटनी रेफर कर दिया गया था। शारीरिक रूप से बेहद कमजोर बच्ची का कटनी के जिला अस्पताल में दो दिन तक इलाज चला फिर नहीं बच सकी। जानकारी के अनुसार ग्राम कचौरी निवासी पिंकी गौड़ पिता पूरन गौड़ ढाई वर्ष की थी। कुपोषण के कारण वह शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो गई थी। ढाई साल की उम्र में ही उसका वजन महज ढाई किग्रा था। हालत यह थी कि वह अपने शरीर को हिला भी नहीं पा रही थी। उसे गंभीर हालत में 17 सितंबर को शाहनगर के पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टर उसे ठीक नहीं कर पाए और कटनी के लिए रेफर कर दिया गया।

मैदानी अमले को ढाई साल तक जानकारी नहीं
आदिवासी परिवार की बच्ची इस कदर कुपोषित थी कि वह चलना तो दूर शरीर को भी नहीं हिला पाती थी। इसके बाद भी गांव में घर-घर जाने वाले मैदानी अमला, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सहायिका, एएनएम, आशा कार्यकर्ता सहित किसी भी जिम्मेदार को भनक तक नहीं लग सकी। यदि मैदानी अमले ने समय पर बच्ची को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया होता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

दो दिन फर्श पर चला इलाज
बताया गया कि कटनी के अस्पताल में बच्ची को एक अदद बेड भी नसीब नहीं हो सका। गरीब आदिवासी माता-पिता किसी से बच्ची के समुचित इलाज की फरियाद भी नहीं कर सके। बच्ची को उचित सुविधाएं नहीं मिल पाने के कारण उसकी सेहत लगातार गिरती गई और दो दिन बाद मौत हो गई। मौत के बाद अभिभावक शव को लेकर गांव आ गए और अंतिम संस्कार कर दिया। एक कुपोषित आदिवासी बच्ची के मौत की किसी को हवा तक नहीं लग पाई।

जिले में हालात गंभीर
जिले के आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की स्थिति बेहद गंभीर है। हालात यह है कि कुछ गांवों में तो 50 से 60 फीसदी तक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार विभागों का मैदानी अमला सक्रिय नहीं हो रहा है। गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चों को मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

बच्ची की मौत कटनी जिला अस्पताल में हुई है। जब शाहनगर से रेफर किया गया था तब बच्ची की हालत नाजुक थी। कटनी में 2 दिन इलाज चला।
एमएल चौधरी, बीएमओ शाहनगर

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