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कटिहार: एक एम्बुलेंस में 17 लोग सवार, स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

बिहार के कटिहार में एक एम्बुलेंस में सात मरीजों के साथ कुल 17 लोगों के सवार होने का मामला सामने आया है, जिस पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत बच्चों को आजमनगर PHC से जिला अस्पताल ले जाने के दौरान की बताई जा रही है।

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बिहार के कटिहार में एक एम्बुलेंस में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि सात मरीजों के साथ कुल 17 लोग एम्बुलेंस में सवार थे। इस मामले पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। सवाल पूछे जाने पर कोई भी स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है। हालांकि, इस घटना ने इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत सात बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), आजमनगर से मेडिकल जांच और इलाज के लिए जिला अस्पताल लाया जा रहा था। यह केंद्र जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर है। एम्बुलेंस में सात बीमार बच्चों के अलावा उनके परिजन भी सवार थे, जिससे कुल संख्या 17 तक पहुंच गई।

17 लोग सवार होने पर उठा सवाल

यह वाकया शुक्रवार का है। कटिहार जिला अस्पताल में तैनात एक डॉक्टर ने बताया कि नियम के अनुसार एक एम्बुलेंस में केवल एक मरीज और उसके साथ अधिकतम दो परिजनों को ही यात्रा की अनुमति होती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एम्बुलेंस चालक ने कहा कि “आजमनगर PHC के मेडिकल ऑफिसर डॉ. शकील अहमद ने मुझे निर्देश दिया था कि मैं सभी सात बच्चों को जिला अस्पताल ले जाऊँ, लेकिन बाद में उनके साथ आए लोग जबरन वाहन में सवार हो गए।”

अधिकारियों से संपर्क नहीं

डॉ. शकील अहमद ने कहा, “ये बच्चे दिव्यांग हैं और इनकी मेडिकल जांच होनी थी।” उन्होंने आगे बताया कि जिला RBSK समन्वयक प्रशांत झा के निर्देश पर ही सभी बच्चों को एक ही एम्बुलेंस में भेजा गया था। सिविल सर्जन जितेंद्र कुमार सिंह और जिला RBSK समन्वयक प्रशांत झा से इस मामले पर टिप्पणी के लिए बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) एक ऐसी योजना है, जिसका उद्देश्य बच्चों में कुछ खास स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान करना और उनका समय पर मेडिकल या सर्जिकल उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि समाज के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।