
Bankipur By Election:बांकीपुर में गेमचेंजर बना मुस्लिम वोट
Bankipur By Election:बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मुस्लिम वोट इस बार सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर बनकर उभर रहा है। अब तक आरजेडी का परंपरागत समर्थन आधार माने जाने वाले मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग के जनसुराज की ओर झुकने की चर्चाओं ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। यह बदलाव मतदान तक कायम रहता है, तो इसका सीधा असर बीजेपी, आरजेडी और जनसुराज तीनों दलों के चुनावी गणित पर पड़ सकता है। ऐसे में बांकीपुर की लड़ाई अब सिर्फ सीट जीतने की नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक समीकरणों की भी अहम परीक्षा बन गई है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की तारीख के नजदीक आने के साथ चुनाव प्रचार भी अब रफ्तार पकड़ता जा रहा है। एक ओर बीजेपी अपनी प्रतिष्ठा और परंपरागत गढ़ को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, तो दूसरी ओर जन सुराज के प्रशांत किशोर लगभग वन-मैन आर्मी की तरह लगातार मैदान में सक्रिय हैं। वह बीजेपी पर लगातार हमलावर हैं और लोगों से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं।
इसी बीच बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में तेजी से बदलते चुनावी समीकरण ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। करीब 10 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता वाला यह क्षेत्र अब नई राजनीतिक हलचल का केंद्र बनता दिख रहा है। अब तक मुस्लिम वोटों को आरजेडी का परंपरागत समर्थन आधार माना जाता रहा है, लेकिन इस बार उस वोट बैंक में दरार पड़ने की चर्चा तेज है। आरजेडी के कुछ वरिष्ठ नेता भी ऑफ द रिकॉर्ड इस बदलते रुझान को स्वीकार कर रहे हैं। मुस्लिम वोटों के इस संभावित बदलाव ने न सिर्फ आरजेडी की चिंता बढ़ाई है, बल्कि बीजेपी की रणनीति पर भी इसका असर पड़ता दिख रहा है। ऐसे में बांकीपुर का चुनावी मुकाबला पहले से कहीं अधिक रोचक और कांटे का होता नजर आ रहा है।
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। 15 प्रतिशत कायस्थ और 12 प्रतिशत यादव मतदाताओं के बाद मुस्लिम वोटर तीसरा सबसे बड़ा वोट बैंक हैं। ऐसे में किसी भी उम्मीदवार की जीत-हार में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। हालांकि, बीजेपी नेता दिनेश पासवान इस दावे को खारिज करते हैं। उनका कहना है, "अगर मुस्लिम वोट बैंक पिछले 40 वर्षों से लालू यादव और आरजेडी के साथ रहा है, तो फिर इस सीट पर आरजेडी लगातार चुनाव क्यों हारती रही?"
इस पर पलटवार करते हुए जनसुराज के नेता और पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना कहते हैं कि पहले आरजेडी के साथ सिर्फ 'एम-वाई' (मुस्लिम-यादव) समीकरण था, लेकिन अब प्रशांत किशोर के साथ 'ए-टू-जेड' सामाजिक समीकरण जुड़ रहा है। उनका दावा है कि जनसुराज को 7 प्रतिशत ब्राह्मण, 7 प्रतिशत भूमिहार, 5 प्रतिशत राजपूत, 9 प्रतिशत चंद्रवंशी, 9 प्रतिशत वैश्य और 8 प्रतिशत दलित समुदाय का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि इसी वजह से बांकीपुर में 10 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता इस चुनाव में जनसुराज के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। क्षेत्र में ऐसी चर्चाएं हैं कि मुस्लिम वोटों का एक वर्ग इस बार आरजेडी के बजाय जनसुराज की ओर झुक सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इससे बीजेपी और आरजेडी दोनों की चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा आरजेडी से दूरी बनाता है, तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है और जनसुराज मुकाबले में मजबूत दावेदार बनकर उभर सकती है। वहीं, बीजेपी भी नहीं चाहती कि विपक्षी वोट जनसुराज के पक्ष में एकजुट हों।
बीजेपी के कुछ नेताओं का कहना है कि यदि मुस्लिम मतदाता आरजेडी के बजाय जनसुराज का साथ देते हैं, तो बांकीपुर का चुनाव सिर्फ रोचक ही नहीं, बल्कि बेहद कांटे का और हाई-वोल्टेज मुकाबला बन जाएगा।
Updated on:
19 Jul 2026 09:15 am
Published on:
19 Jul 2026 07:52 am
