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Bihar Politics: आरजेडी में ‘ऑल इज़ नॉट वेल’! मृत्युंजय की शर्त पर फंसा आलाकमान, बड़ी टूट के संकेत

Bihar Politics: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुके प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी की वापसी अब उनकी शर्तों पर अटक गई है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव को पद से हटाने की मांग रखी है
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RJD Mrityunjay Tiwari

राजद के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी (फ़ोटो- ANI)

Bihar Politics: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अंदरूनी राजनीतिक घटनाक्रम ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। मुस्लिम वोट बैंक में संभावित नाराजगी और यादव वोट में सेंध की आशंकाओं के बीच पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुके प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का नया रुख आरजेडी के लिए नई चुनौती बन गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी नेतृत्व मृत्युंजय तिवारी पर इस्तीफा वापस लेने का दबाव बना रहा है। हालांकि, इसके बदले उन्होंने ऐसी शर्त रख दी है, जिस पर पार्टी आलाकमान फिलहाल चुप्पी साधे हुए है।

मृत्युंजय की शर्त से असहज आरजेडी

सूत्रों का दावा है कि मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से स्पष्ट कहा है कि पहले शक्ति यादव को मुख्य प्रवक्ता के पद से हटाया जाए, उसके बाद ही आगे बातचीत होगी। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर मृत्युंजय तिवारी को पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है। पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि यदि आरजेडी नेतृत्व इस विवाद पर जल्द फैसला नहीं करता, तो बांकीपुर उपचुनाव के बाद पार्टी के कई अन्य नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं या संगठन छोड़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, शक्ति यादव को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के करीबी और राज्यसभा सांसद संजय यादव का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में यह मामला पार्टी नेतृत्व के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर चुनौती बनता जा रहा है।

मृत्युंजय की शर्त पर टिकी वापसी

पार्टी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का अपने सभी पदों से इस्तीफा राजनीतिक जानकारों की नजर में महज एक पद छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के इर्द-गिर्द सक्रिय बताए जाने वाले सलाहकारों के प्रभाव के खिलाफ खुली नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मृत्युंजय तिवारी की नाराजगी उन आरोपों से भी मेल खाती है, जो पहले लालू परिवार के सदस्य तेज प्रताप यादव और रोहिणी आचार्य सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं।

आरजेडी में बढ़ी बगावत की आहट

पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि आरजेडी नेतृत्व इस विवाद का जल्द समाधान नहीं करता, तो संगठन में बड़ी टूट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह मानी जा रही है कि मृत्युंजय तिवारी ने अभी तक किसी अन्य राजनीतिक दल का दामन नहीं थामा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि उनकी शर्तों पर सहमति बनती है तो उनके पार्टी में लौटने की संभावना बनी हुई है। वहीं, यदि ऐसा नहीं होता है तो वह अपने समर्थकों के साथ किसी अन्य राजनीतिक दल में नई राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं। इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी नाराज नेताओं को मनाने और डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

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