
पत्रकारों से बात करते केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी। फोटो- पत्रिका
Bihar Assembly Elections बिहार में शराबबंदी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस बयान पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष ने भी इसपर तंज कस रहा है। दरअसल, जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून को लेकर कहा शराब पीने पर पकड़े गए लोगों या जिन पर मुकदमा दर्ज हुआ है, उन्हें सरकार माफ कर दे। उन्होंने कहा कि बिहार में पुलिस शराब माफियाओं के बजाय छोटे-मोटे उपभोक्ताओं को पकड़ रही है। जो कि गलता है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने इस पर तंज कसते हुए कहते हैं प्रदेश की एनडीए सरकार अपनी हार को देखते हुए वह सब काम करना चाह रही जिससे उसकी नैया पार हो जाए। यही कारण है कि नीतीश सरकार पांच साल शांत रही और जब चुनाव आया तो फटाफट घोषाणा कर रही है।
बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी कानून लागू है। नीतीश सरकार की यह एक प्रमुख पहल है। लेकिन इसको लेकर विवाद भी कम नहीं है। इस बीच जीतन राम मांझी ने ऐसे समय इसपर बहस छेड़ दिया है जब बिहार में विधानसभा चुनाव एकदम करीब है। उनके शराबबंदी को लेकर दिए गए बयान ने सत्ताधारी जेडीयू-बीजेपी गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष, खासकर आरजेडी और कांग्रेस पहले से ही शराबबंदी को ‘नाकाम’ बताकर नीतीश सरकार पर हमला करते आ रही है।
नीतीश सरकार ने 2022 में हुई समीक्षा के बाद कानून में कुछ ढील दी थी। जिसमें शराब पीने वालों के लिए जेल के बदले जुर्माने का प्रावधान किया गया था। मांझी ने एक बार और कहा, “सरकार को अपनी नीति पर अमल करना चाहिए और माफियाओं के खिलाफ सख्ती दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हजारों लीटर शराब की तस्करी करने वालों को छोड़कर पुलिस छोटे लोगों को क्यों पकड़ रही है?” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब की तस्करी हो रही है। जहरीली शराब के कारण मौतों की खबरें भी सामने आती रहती हैं।
Updated on:
11 Sept 2025 08:25 pm
Published on:
11 Sept 2025 08:23 pm
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