
पटना के कोतवाली थाना प्रभारी, भागलपुर के एसडीओ और मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी
बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लगभग हर सभा में कहते हैं कि अपराधी या तो अपराध छोड़ दें या राज्य। उनके बयान का मकसद यही होगा कि राज्य की जनता भय मुक्त जीवन जी सके। जनता में यह संदेश जाना इसलिए भी जरूरी है कि जिस नीतीश कुमार के जाने के बाद सम्राट सीएम बने हैं, उन्होंने अपनी छवि 'सुशासन बाबू' के रूप में बना ली थी। सम्राट के लिए उस छवि को अपने साथ जोड़ना राजनीतिक रूप से जरूरी है। इसमें उन्हें कामयाबी तभी मिलेगी जब नौकरशाही उनका साथ दे। वे न केवल जनता को अपराधियों के भय से मुक्त कराएं, बल्कि यह यकीन भी दिलाएं कि अफसर जनता को नाहक परेशान करने के लिए नहीं हैं। लेकिन हाल की कई घटनाओं से ऐसा लगता है कि भय मुक्त शासन देने की सम्राट चौधरी की योजना में अफसर ही पलीता लगा देंगे।
बिहार में हाल में सामने आई कुछ घटनाओं से ऐसा लगता है कि अफसर जनता को अपने खौफ के साये में रखना चाहते हैं। ये घटनाएं भागलपुर, मोतिहारी और पटना की हैं। भागलपुर के सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) विकास कुमार ने बीते दिनों जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में दोनों पक्षों को बुलाया और एक पक्ष को काफी प्रताड़ित किया। इस मामले में पीड़ित पक्ष सावित्री राजहंस का आरोप है कि (एसडीओ) ने 10 जुलाई को उन्हें, उनके दोनों बेटों और बहुओं को अपने कार्यालय बुलाया। उनका कहना है कि अपना पक्ष रखने पर उसे सुनने के बजाय एसडीओ भड़क गए और अपमानजनक व अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे। उन्होंने उनके छोटे बेटे को जोगसर थाना पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने उनके बीमार बेटे को करीब चार घंटे थाने में बिठाए रखा और अपराधियों से भी बदतर सलूक किया।
इस मामले में हमने विकास कुमार का पक्ष भी जाना। उन्हें मैसेज और कई बार फोन किया। तब जाकर उनसे बात हो पाई। उन्होंने बुजुर्ग और विधवा सावित्री राजहंस को 'बदमाश महिला' बताते हुए जमीन विवाद में सरकारी आदेश नहीं मानने का दोषी बताया और कहा कि जरूरत पड़ने पर इससे भी ज्यादा सख्ती करेंगे।उन्होंने बिना किसी आधार के बुजुर्ग महिला के बेटे को पूरे परिवार के सामने बेइज्जत करने और पुलिस थाने में रखे जाने का कोई कारण नहीं बताया। जब पूछा गया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और कोर्ट का कोई अंतिम आदेश आया ही नहीं है तो इस तरह की कार्रवाई कैसे की जा सकती है, तो जवाब दिए बिना एसडीओ ने फोन काट दिया। हालांकि, उन्होंने 17 जुलाई की सुनवाई में विरोधी पक्ष को कोर्ट का आदेश आने का इंतजार करने के लिए कहा।
बता दें कि सावित्री राजहंस का मामला भागलपुर के सब जज-9 की अदालत में बंटवारा वाद संख्या 454/25 के तहत विचाराधीन है। इस मामले में न्यायालय की ओर से स्थगन आदेश जारी किया गया है।
सरकारी संवेदनहीनता का एक और मामला बिहार के मोतिहारी से सामने आया है। यहां जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय में अपनी पत्नी का चार वर्षों से लंबित वेतन दिलाने के लिए अरविंद कुमार शर्मा लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे थे।
11 जुलाई को भी वह अपनी पत्नी के बकाया वेतन के भुगतान की मांग लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि वहां उन्हें अधिकारियों की फटकार का सामना करना पड़ा। इसी दौरान कार्यालय परिसर में ही वह अचानक चक्कर खाकर गिर पड़े, जिससे उनकी मौत हो गई।
अरविंद कुमार शर्मा की पत्नी रश्मि स्वराज गायघाट स्थित उजयन लोहियार स्कूल में शिक्षिका हैं। उनका वेतन पिछले चार वर्षों से लंबित था। अरविंद की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया और 14 जुलाई को एकमुश्त पूरे बकाया वेतन का भुगतान कर दिया।
हालांकि, भुगतान मिलने के बाद भी परिवार का दर्द कम नहीं हुआ। रश्मि स्वराज ने भावुक होकर कहा, "अब इस पैसे का मैं क्या करूंगी, जब मेरा सुहाग ही उजड़ गया?" इस घटना ने सरकारी कार्यप्रणाली, प्रशासनिक संवेदनशीलता और वर्षों तक लंबित मामलों के निस्तारण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, इस मामले पर मोतिहारी के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा, "मैं कुछ ही दिन पहले यहां पदस्थापित हुआ हूं। मुझे इस पूरे मामले की जानकारी नहीं है।" उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि UAN बनने में देरी होने के कारण वेतन का भुगतान समय पर नहीं हो सका, जिससे पूरा मामला वर्षों तक लंबित रहा।
पटना में बंटी यादव के अपहरण के बाद हत्या का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। बंटी यादव का 6 जुलाई को पटना जंक्शन स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर के पास से कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था। किडनैपिंग के पांचवें दिन, यानी 11 जुलाई को पुलिस ने उसका शव पटना जंक्शन से करीब 60 किलोमीटर दूर अथमलगोला थाना क्षेत्र से बरामद किया।
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बंटी यादव पटना रेलवे स्टेशन के आसपास कथित तौर पर संचालित देह व्यापार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहा था। उनका कहना है कि उसने इस संबंध में कई बार पुलिस से शिकायत भी की थी। आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने के कारण शिकायत की जानकारी संबंधित गिरोह तक पहुंच गई, जिसके बाद बंटी का कथित तौर पर अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई।
इस घटना के बाद पटना के एसएसपी ने एक एएसआई समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, पटना पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल एक आरोपी को मुठभेड़ (एनकाउंटर) के बाद गिरफ्तार करने का दावा किया है। हालांकि, मामले का मुख्य आरोपी अब भी फरार है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। दूसरी ओर, परिजनों का आरोप है कि पुलिस पूरे मामले को दबाने और रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है।
Updated on:
20 Jul 2026 04:35 pm
Published on:
20 Jul 2026 04:31 pm
