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Bankipur By Election: बांकीपुर उपचुनाव में सवर्ण वोट बैंक की परीक्षा, भाजपा और जन सुराज के बीच सीधी टक्कर

Bankipur By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आते ही चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। भाजपा, जन सुराज और राजद के बीच जारी इस जंग में विकास, सुशासन और बदलाव के मुद्दों के साथ-साथ जातीय समीकरण भी निर्णायक भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।
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रणवीर नंदन

रणवीर नंदन- पत्रिका

Bankipur By Election: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार तेज़ हो गया है। इस सीट पर सवर्ण मतदाताओं को अहम चुनावी वर्ग माना जाता है और चुनावी माहौल में जातीय समीकरण भी चर्चा के केंद्र में हैं। खासकर कायस्थ वोटरों के रुख पर सभी राजनीतिक दलों की नजर टिकी हुई है।

कायस्थ समाज से जुड़े मतदाता विवेक श्रीवास्तव ने कहा, "हमारे लिए यह सिर्फ़ भाजपा की लड़ाई नहीं है, बल्कि हमारी जातीय पहचान का भी सवाल है। इसलिए बड़ी संख्या में कायस्थ मतदाता एकजुट होकर मतदान करेंगे।" हालांकि, सभी सवर्ण मतदाता एक राय नहीं हैं। ब्राह्मण समुदाय से जुड़े शिवनाथ चौबे का कहना है, "इस बार बदलाव जरूरी है। पिछले 40 वर्षों से एक ही परिवार को मौका मिलता रहा है। अब हम किसी दूसरे विकल्प को मौका देना चाहते हैं।"

सवर्ण-कायस्थ वोट पर सबकी नजर

मतदान में अब केवल 10 दिन शेष हैं और माना जा रहा है कि 20 जुलाई से चुनाव प्रचार और तेज़ होगा। ऐसे में विभिन्न जातीय समीकरणों, खासकर सवर्ण और कायस्थ मतदाताओं के रुझान पर सभी दलों की नजर है। स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विद्वान प्रो. के.सी. सिन्हा के जन सुराज पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने और व्यापारी वर्ग के एक हिस्से के समर्थन से भाजपा को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है। हालांकि, जन सुराज इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है। पार्टी का कहना है कि भाजपा का पारंपरिक समर्थक माने जाने वाले वैश्य समुदाय का बड़ा वर्ग भी इस बार जन सुराज के साथ खड़ा है और इसका असर मतदान के दिन साफ दिखाई देगा।

'कायस्थ वोट में ध्रुवीकरण' का दावा

सेवानिवृत्त शिक्षक विजय मोहन प्रसाद ने कहा, "बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख और पड़ोसी कुम्हरार विधानसभा क्षेत्र में 80 हजार से एक लाख तक कायस्थ मतदाता हैं। पहली बार प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने के बाद भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में कायस्थ मतदाताओं का ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है।" उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के बाद सबसे अधिक कायस्थ आबादी बांकीपुर और उसके बाद कुम्हरार क्षेत्र में है। उनके अनुसार, "कुम्हरार सीट भाजपा के हाथ से निकल चुकी है। अब हम बांकीपुर को नहीं जाने देना चाहते। इस बार उम्मीदवार से ज्यादा जातीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर मतदान होगा। यह सिर्फ मेरी राय नहीं, बल्कि समाज के कई लोगों की सोच है।"

उन्होंने आगे कहा, "यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि हमारी पहचान का भी सवाल बन गया है। अलग-अलग दलों से जुड़े कई कायस्थ मतदाता भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने का मन बना रहे हैं, ताकि विधानसभा में समाज का प्रतिनिधित्व बना रहे। नितिन नवीन को पार्टी में अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद भी समाज का झुकाव भाजपा की ओर बढ़ा है।" वहीं, सब्जीबाग निवासी फजल ने अलग राय रखते हुए कहा, "बदलाव जरूरी है। इसलिए इस बार हम जन सुराज को वोट देंगे।"

भाजपा ने विकास को बनाया मुद्दा

बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने कहा कि भाजपा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा और महिला मतदाता पहले की तरह इस बार भी पार्टी का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा, "राजद के शासनकाल में पटना के लोग रात में घर से निकलने से डरते थे। लेकिन नीतीश कुमार के नेतृत्व और अब सम्राट चौधरी सरकार में कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है। जनता विकास और सुशासन के आधार पर मतदान करेगी। हमें विश्वास है कि इस बार पिछली बार से भी अधिक मतों से जीत मिलेगी।"

फिलहाल पूरे बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार चरम पर है। भाजपा, जन सुराज और राजद समेत सभी प्रमुख दलों के कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रचार और तेज़ होने के साथ चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।