
चुनाव आयोग (फाइल फोटो)
बिहार के सभी 12 मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दलों को चुनाव आयोग रविवार से नोटिश भेजने की प्रक्रिया शुरू करेगा। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के पर चुनाव आयोग ने नोटिश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि प्रारूप मतदाता सूची में नाम जोड़ने और सुधार की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी तय होगी। इसमें राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी होगी और वो हर मतदाता को सहयोग करने के लिए बाध्य होंगे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चुनाव आयोग मान्यता प्राप्त दलों को इस मामले में प्रतिवादी बनाया जाएगा। उनके अध्यक्ष/ कार्यकारी अध्यक्ष/ महासचिव को नोटिस जारी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों बिहार में चल रहे एसआईआर पर सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के अध्यक्ष या महासचिव को 8 सितंबर को होने वाली सुनवाई में पेश होना होगा और सभी दलों को स्टेटस रिपोर्ट फाइल करके बताना होगा कि वे अपने बूथ लेवल एजेंट के जरिए कितने मतदाताओं की मदद पहुंचाई। बिहार के मान्यता प्राप्त 12 राजनीतिक दलों के पास 160000 बूथ लेवल एजेंट है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सारे राजनीतिक दल मिलकर पूरे बिहार में सिर्फ दो ही दावे और आपत्ति दाखिल कर सके हैं। चुनाव आयोग के अनुसार नौ लोगों ने आपत्ति दाखिल किया है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के सभी 160000 बूथ लेवल एजेंट को यह आदेश दिया है कि वो लोग जो उन 65 लाख लोगों की सूची में शामिल हैं, जिनके नाम गलती से ड्राफ्ट रोल में छूट गए हैं। वो उनकी मदद करें। यह वो मतदाता है, जो मृत भी नहीं है और बिहार छोड़कर कहीं नहीं गए। आपको बता दें बिहार के मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
Updated on:
23 Aug 2025, 10:05 PM IST
Published on:
23 Aug 2025, 10:04 PM IST
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