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Bihar Land Dispute: बिहार में जमीन विवाद से पुलिस बाहर, कानून-व्यवस्था तक ही रहेगा अब हस्तक्षेप

राजस्व विभाग ने गुरूवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए पुलिस की भूमिका पर ब्रेक लगा दी है। राजस्व विभाग के ताजा फैसले से जमीन विवादों पर पुलिस की भूमिका केवल शांति बनाए रखने तक सीमित कर दी गई है।
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bankipur bypoll, bihar bjp leader vijay sinha

विजय सिन्हा (फोटो- X@VijayKrSinhaBih)

Bihar Land Dispute: भूमि विवाद से जुड़े मामलों में राज्य सरकार ने पुलिस हस्तक्षेप को लेकर बड़ा और स्पष्ट फैसला लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्राप्त परिवादों के विश्लेषण के आधार पर थाना स्तर पर पुलिस प्रशासन की भूमिका को सीमित करते हुए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया। यह दिशा-निर्देश 1 फरवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होंगे। अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी एवं प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी संयुक्त पत्र में साफ किया गया है कि भूमि विवाद के मामलों में पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहेगी। पुलिस बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश के न तो दखल-कब्जा दिला सकेगी और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य या चहारदीवारी कराएगी।

थाना डायरी में होगी विस्तृत प्रविष्टि

दिशा-निर्देश के अनुसार, किसी भी भूमि विवाद की सूचना मिलते ही थाना द्वारा स्टेशन डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा। इसमें दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद की प्रकृति (राजस्व, सिविल या आपसी), विवादित भूमि का पूरा विवरण (थाना, खाता, खेसरा, रकबा, किस्म), विवाद का संक्षिप्त विवरण और पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई दर्ज की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि मामला प्रथम दृष्टया किस राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है।

अंचलाधिकारी को देना होगा लिखित सूचना

प्रत्येक भूमि विवाद की जानकारी संबंधित थाना प्रभारी द्वारा अनिवार्य रूप से अंचलाधिकारी को लिखित रूप में दी जाएगी। यह सूचना ई-मेल या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से भी भेजी जा सकती है, ताकि राजस्व और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

शनिवार को अंचल स्तर पर संयुक्त बैठक अनिवार्य

भूमि विवाद के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक होगी। इन बैठकों में मामलों के समाधान की प्रगति को विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 22 जुलाई 2025 को हुई समीक्षा बैठक के निर्देशों के अनुरूप, थाना प्रभारी स्वयं या उनकी अनुपस्थिति में अतिरिक्त थाना प्रभारी इन बैठकों में शामिल होंगे।

धारा 107/116 की प्रक्रिया यथावत

सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व की भांति धारा 107/116 दंड प्रक्रिया संहिता (BNS के समकक्ष) के तहत पुलिस की भूमिका नियमानुसार बनी रहेगी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर भूमि विवाद में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

'सबका सम्मान, जीवन आसान' पर राज्य सरकार का जोर

पत्र में कहा गया है कि माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत “सबका सम्मान-जीवन आसान (Ease of Living)” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। राज्य के लगभग 4.5 करोड़ जमाबंदी धारकों को भूमि से जुड़े विवादों में पारदर्शी, संवेदनशील और त्वरित समाधान मिल सके, यही इस व्यवस्था का उद्देश्य है।