
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से ही प्रदेश में आरजेडी और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। राज्य सभा चुनाव के बाद इन चर्चाओं को और बल मिला है। दरअसल, कांग्रेस के 6 में से 3 विधायकों ने राज्य सभा चुनाव में वोटिंग से खुद को अलग रखा। इन विधायकों का कहना है कि पार्टी की ओर से उन्हें यह स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया था कि किसे वोट करना है।
बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने उन्हें अपनी इच्छा से वोट डालने की बात कही थी। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस ने इस वोटिंग से दूरी बना ली थी। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कांग्रेस ने किसी भी विधायक को वोट देने से मना नहीं किया था। लेकिन, वे इस सवाल पर चुप्पी साध गए कि आखिर पार्टी की ओर से किसे वोट देना है, इसको लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया गया था या नहीं।
राज्य सभा चुनाव को लेकर आरजेडी की ओर से जो रणनीति बनाई जा रही थी, उससे कांग्रेस के ज्यादातर नेता दूरी बनाते नजर आए। किसी भी अहम बैठक में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम या प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू शामिल नहीं दिखे। वहीं,राज्य सभा सांसद अखिलेश सिंह आखिरी समय में सक्रिय हुए।
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी इस पूरे घटनाक्रम में कहीं नजर नहीं आए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर उनसे किसी ने कोई संपर्क नहीं किया। न तो तेजस्वी यादव ने उनसे बात की और न ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी या शीर्ष नेतृत्व ने कोई संवाद किया।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव को लेकर किसी तरह का कोई समन्वय नहीं था। पप्पू यादव ने बताया कि उन्होंने एडी सिंह से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में कांग्रेस के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि आखिर वे किसे वोट करते।
इधर, विधानसभा चुनाव के बाद से ही जदयू का एक बड़ा नेता कांग्रेस विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश में लगा हुआ था। कांग्रेस से जदयू में शामिल हुए इस नेता ने कई विधायकों से व्यक्तिगत तौर पर संपर्क भी किया था। बताया जा रहा है कि उन्होंने कांग्रेस विधायकों को जदयू ज्वाइन करने का प्रस्ताव दिया, जिसमें उनके क्षेत्रों में मनचाहे अधिकारियों की पोस्टिंग, क्षेत्रीय योजनाओं में सहयोग और बोर्ड-निगमों में अहम जिम्मेदारी देने का आश्वासन शामिल था।
यह भी चर्चा है कि पश्चिमी चंपारण के एक विधायक खुद ही कांग्रेस छोड़ने के इच्छुक थे। ऐसे हालात में राज्यसभा चुनाव के दौरान इन विधायकों को अनुपस्थित कराना एनडीए के लिए अपेक्षाकृत आसान हो गया।
Updated on:
17 Mar 2026 09:22 pm
Published on:
17 Mar 2026 09:22 pm
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