
बिहार की शाही लीची अब यूरोप का करेगी सफर
पटना. जीआइ टैग मिलने के बाद मानो शाही लीची को पंख लग गया है। इस फल का विस्तार मुजफ्फरपुर से उत्तर भारत के बाद दक्षिण भारत में भी हो रहा है। इसका लाभ यह होगा कि शाही लीची का यूरोपीय देश के लोग भी स्वाद उठा पाएंगे। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दक्षिण भारत में तैयार होने वाली शाही लीची निर्यात के लिए सबसे उपयुक्त है। यह इसलिए कि यहाँ दिसंबर यानी जाड़े में शाही लीची फल रही है। मुजफ्फरपुर में गर्मी के दिनों में लीची का फलन होता है। तापमान के कारण उसको निर्यात करने में बहुत परेशानी होती है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र तमिलनाडृ, केरल व कर्नाटक में आने वाले दिन में लीची का विस्तार करेगा। इससे किसानों की आमदनी दोगुनी होगी। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने कहा कि यूरोप के विभिन्न देशों के लिए दक्षिण भारत की लीची सबसे उपयुक्त है। यूरोप में क्रिसमस के समय इसकी बेहतर मांग रहती है। इसके साथ इस समय देश के बाजार में दूसरा कोई मौसमी फल बाजार में नहीं रहता। जबकि गर्मी के दिन में आम उपलब्ध रहता है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने कहा कि यूरोप के विभिन्न देशों के लिए दक्षिण भारत की लीची सबसे उपयुक्त है। यूरोप में क्रिसमस के समय इसकी बेहतर मांग रहती है। इसके साथ इस समय देश के बाजार में दूसरा कोई मौसमी फल बाजार में नहीं रहता। जबकि गर्मी के दिन में आम उपलब्ध रहता है।
Published on:
13 Dec 2023 09:33 pm
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