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कॉफी हाउस की भविष्यवाणी से बिहार की सत्ता तक, नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ एक युग का अंत

बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का अपना लगभग 20 साल का कार्यकाल नीतीश कुमार ने समाप्त कर दिया।

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CM नीतीश कुमार (ANI)

बिहार के नालंदा ज़िले के रहने वाले नीतीश कुमार ने 1977 का चुनाव हारने के बाद पटना के डाक बंगला चौक स्थित एक कॉफी हाउस में पत्रकार सुरेंद्र किशोर के साथ से बातचीत के दौरान ऐलान किया था कि वह एक दिन ज़रूर मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने मेज पर हाथ पटकते हुए आत्मविश्वास के साथ कहा था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद बेहतर काम करेंगे। उस समय नीतीश कुमार हरनौत विधानसभा से चुनाव हार चुके थे, लेकिन उनका आत्मविश्वास बरकरार था। उन्होंने दृढ़ता से कहा था कि वह एक दिन चुनाव ज़रूर जीतेंगे। नीतीश कुमार 1974 के जेपी आंदोलन से उभरकर सामने आए थे। हालांकि, उन्होंने देखा कि उनके साथी लालू प्रसाद महज़ 29 साल की उम्र में छपरा से सांसद बन गए, जबकि अपेक्षाकृत कम चर्चित मिथिलेश कुमार सिंह भी विधायक चुने गए थे।

संघर्ष के दौर से सात दिन के सीएम तक

नीतीश कुमार ने 1972 में बिहार कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद पूरी तरह राजनीति में आने का फैसला कर लिया था। हालांकि, उन्हें 1985 तक चुनावी सफलता नहीं मिली, जब उन्होंने हरनौत विधानसभा सीट से जीत हासिल की। तब तक लालू प्रसाद ने कर्पूरी ठाकुर की शैली में एक प्रमुख, दूसरी पीढ़ी के समाजवादी नेता के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना ली थी। 1990 से 2005 तक बिहार की राजनीति पर लालू का दबदबा रहा। इस दौर में नीतीश कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धि साल 2000 में केवल सात दिनों के लिए मुख्यमंत्री बनना रही। लालू के प्रभाव वाले इस लंबे राजनीतिक काल में प्रासंगिक बने रहने के लिए नीतीश कुमार ने अपना अधिकांश समय केंद्र की राजनीति में सक्रिय रहते हुए बिताया।

20 साल का शासन खत्म

नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने इस्तीफे के साथ बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले अपने लगभग 20 साल के कार्यकाल का समापन कर दिया और अब वह राज्य सभा की ओर रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अपने महान पूर्ववर्तियों श्रीकृष्ण सिंह, कर्पूरी ठाकुर और लालू प्रसाद की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। जहाँ श्रीकृष्ण सिंह को उद्योगों और उत्कृष्ट शैक्षिक व चिकित्सा संस्थानों की स्थापना के कारण अक्सर “आधुनिक बिहार का निर्माता” कहा जाता है, वहीं कर्पूरी ठाकुर ने OBC, EBC और दलितों को सशक्त बनाकर सामाजिक न्याय की आवाज़ को मजबूत किया। दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव ने इस सामाजिक न्याय के मॉडल को आगे बढ़ाया। नीतीश कुमार, जिन्होंने बिहार में दस बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड बनाया, ने मंगलवार को अपनी सरकार भंग कर औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया।

21 साल में 10 बार मुख्यमंत्री बने नीतीश

  1. 3 मार्च 2000 को नीतीश कुमार वह पहली बार बीजेपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन, विधानसभा में बहुमत नहीं होने की वजह से उन्हें 10 मार्च 2000 को इस्तीफा देना पड़ा था। नीतीश कुमार यह उनका सबसे छोटा सिर्फ सात दिन का कार्यकाल रहा।
  2. 2005 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिला। 24 नवंबर 2005 को नीतीश कुमार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने।
  3. 26 नवंबर 2010 को नीतीश कुमार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
  4. 22 फरवरी 2015 को नीतीश कुमार चौथी बार मुख्यमंत्री बने।
  5. 20 नवंबर 2015 को उन्होंने पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
  6. जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर फिर से एनडीए के साथ मिलकर 27 जुलाई 2017 को उन्होंने छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
  7. 2020 के विधानसभा चुनाव के बाद 16 नवंबर 2020 को नीतीश कुमार सातवीं बार मुख्यमंत्री बने।
  8. अगस्त 2022 में उन्होंने फिर गठबंधन बदला और आरजेडी-कांग्रेस के साथ सरकार बनाकर आठवीं बार मुख्यमंत्री बने।
  9. जनवरी 2024 में उन्होंने महागठबंधन से अलग होकर फिर एनडीए में वापसी की और नौवीं बार मुख्यमंत्री बने।
  10. इसके बाद 20 नवंबर 2025 को उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।