
तेज प्रताप यादव के साथ बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी। फोटो-पत्रिका
Makar Sankranti 2026: बिहार में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज को लेकर बिहार में सियासी तापमान बढ़ गया है। पटना में लालू-राबड़ी आवास या फिर मुख्यमंत्री का सरकारी आवास दही-चूड़ा भोज को लेकर अक्सर चर्चा में रहता रहा है, लेकिन इस वर्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का घर दही चूड़ा भोज को लेकर चर्चा में है। तेज प्रताप का आवास आज पावर सेंटर बन गया। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद समेत कई दिग्गज तेज प्रताप यादव के घर पर आयोजित दही-चूडा भोज में पहुंचे। लेकिन, अभी तक तेजस्वी यादव नहीं पहुंचे हैं। सबकी नजर तेजस्वी यादव पर टिकी हुई है।
मकर संक्रांति के मौके पर तेजप्रताप यादव के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के साथ साथ बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, बड़े मामा प्रभुनाथ यादव, साधु यादव और विधायक चेतन आनंद भी पहुंचे थे।
लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने अपने घर आयोजित दही-चूड़ा भोज में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री और आरएलएम नेता दीपक प्रकाश, मंत्री और हम अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन, बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह, मंत्री मदन सहनी, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी, मंत्री श्रीमती लेशी सिंह समेत कई नेताओं को आमंत्रण पत्र खुद अपने हाथों से दे चुके हैं। तेज प्रताप के आमंत्रण पर तेजप्रताप यादव पहुंचना शुरू हो गया है।
तेजस्वी यादव के दही-चूड़ा भोज में नहीं आने पर तेज प्रताप यादव ने चुटकी लेते हुए कहा कि छोटा भाई थोड़ी देर से उठते हैं। इसलिए, आने में समय लग रहा है। लेकिन, मुझे विश्वास है वे जरूर आएंगे। संजय यादव की ओर इशारा करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि जयचंदवा अभी घेरा होगा। रात 9 बजे तक मैं तेजस्वी का इंतजार करूंगा।
लालू प्रसाद के मित्र और आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी ने इसको लेकर तेज प्रताप की तारीफ करते हुए तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए लिखा है कि आज मकर संक्रांति का दही चूड़ा भोज की राजनीति के रंग में डूबा हुआ है। इस रंग में कोई एक व्यक्ति सराबोर दिखाई दे रहा है तो उसका नाम तेज प्रताप है। तेजस्वी तो बिल्कुल ओझल हैं। 10 नम्बर में सन्नाटा है। वही 10 नंबर जहाँ बिहार के कोने कोने से राजद कार्यकर्ता पहुंचते थे। दही चूड़ा तो बहाना होता था। असल तो नेताओं से देखा देखी होती थी। दरस परस और दण्ड प्रणाम होता थ। सब यहाँ से नई ऊर्जा के साथ अपने इलाक़े में लौटते थे।
Updated on:
14 Jan 2026 06:54 pm
Published on:
14 Jan 2026 02:59 pm
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