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सत्ता हस्तांतरण में जल्दबाज़ी क्यों? नीतीश के राज्यसभा जाने पर JDU विधायक ने खड़े किए सवाल

नीतीश कुमार के मित्र और जदयू विधायक सरयू राय ने कहा सत्ता हस्तांतरित करने का यह सही समय नहीं है। अचानक से ऐसा करना जनता और समर्थकों को ठीक नहीं लग रहा है।

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CM नीतीश कुमार (ANI)

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर के बाद जदयू विधायक में नाराजगी साफ दिखने लगी है। इसको लेकर जदयू विधायक सरयू राय ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि मुझे लगता है कि ये उचित समय नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि नेतृत्व जो भी करता है वह सोच-समझकर करता है, लेकिन, मेरी समझ से यह निर्णय सही समय पर होता है तो उसका अच्छा नतीजा निकलता। चुनाव के बाद इस तरह से आम जनता को अचानक से बताना कि नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं ये उचित नहीं है।

सत्ता हस्तांतरित करने का यह सही समय नहीं

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता हस्तांतरित करने का यह सही समय नहीं है। अचानक से ऐसा करना जनता और समर्थकों को ठीक नहीं लग रहा है। हमारे जैसे नेता को भी यह ठीक नहीं लग रहा है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा करने से पहले पार्टी के सीनियर नेताओं को व्यापक विमर्श करना चाहिए था। सरयू राय ने कहा कि नीतीश कुमार को कुछ दिन और बिहार में रहना चाहिए।

नीतीश कुमार पर कोई दबाव नहीं डाल सकता

किसी के दबाव में यह सब हो रहा है, मीडिया के इस सवाल पर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार पर कोई दबाव नहीं डाल सकता है। उन्होंने अपनी शर्तों पर सरकार चलाई है। वे आज की तिथि में बिहार के सर्वमान्य नेता हैं। वो तैयार हैं और एनडीए के नेता उनको राज्यसभा भेजना चाहते हैं तो फिर इसमें किसी को क्या आपत्ति है। बहरहाल गुरुवार (05 मार्च, 2026) को राज्यसभा के नामांकन का आज अन्तिम दिन है। इसके बाद सारा तस्वीर साफ हो जायेगा।

सत्ता में बदलाव के संभावित समीकरण

इधर, राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की स्थिति में कई स्थितियों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पहली स्थिति जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है बिहार में पहली बार भाजपा के मुख्यमंत्री का रास्ता साफ होगा और उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाकर सत्ता में हिस्सेदारी दी जा सकती है।दूसरी संभावना यह है कि नीतीश कुमार फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने रहें, लेकिन बेटे निशांत को राज्यसभा भेजकर उनकी विधिवत पॉलिटिकल लॉन्चिंग कर दी जाए ताकि जेडीयू का भविष्य सुरक्षित हो सके। वहीं तीसरी स्थिति में पार्टी किसी बड़े बदलाव के बजाय रामनाथ ठाकुर के साथ किसी पुराने वफादार और भरोसेमंद चेहरे पर ही फिर से दांव खेल सकती है।