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सीट बंटवारे पर नीतीश का दबाव, एनडीए में उथल-पुथल के आसार

बिहार में एनडीए सरकार के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले चुनाव में क्या करेंगे, इसे लेकर कयासों का दौर है कि आखिर जदयू के थिंक टैंक का प्रेशर वे किस तरह से अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा की तरफ शिफ्ट कर सकते हैं।

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पटना

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Brijesh Singh

Jun 28, 2018

nitish-modi file

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प्रियरंजन भारती

पटना। आगामी लोकसभा चुनाव में जाने से पहले एनडीए के घटक दलों के बीच तनातनी का दौर फिलहाल चरम पर है। दबाव सीट बंटवारे और वर्चस्व को लेकर बना हुआ है। बिहार में एनडीए सरकार के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले चुनाव में क्या करेंगे, इसे लेकर कयासों का दौर है कि आखिर जदयू के थिंक टैंक का प्रेशर वे किस तरह से अपने गठबंधन सहयोगी भाजपा की तरफ शिफ्ट कर सकते हैं। हालांकि सीट बंटवारे को लेकर हाल ही में यह कह कर नीतीश ने एक तरह से भाजपा पर प्रेशर बना भी दिया है कि अगर वे चाहें तो 40 की 40 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ लें।

नीतीश की चाल पर तेजस्वी ने लगाया पलीता

माना जा रहा है कि जदयू और भाजपा के बीच सीट बंटवारे का पेंच अभी और गंभीर हो सकता है, जब तक कि भाजपा आलाकमान की तरफ से कोई कोशिश नहीं की जाती। फिलहाल तो नीतीश कुमार ने कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव का हालचाल लेने के बहाने बातचीत करके भाजपा पर दबाव बढ़ाने की नीति अपना रखी है। हालांकि उनकी इस कवायद को लालू के वारिस और अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किए जा रहे तेजस्वी यादव ने ही पलीता लगा कर उनकी राजनीतिक चतुराई की धार को कुंद करने की भी कोशिश की।

हाल-चाल पॉलिटिक्स से गरम हुई राजनीति

बहरहाल, लालू यादव से बातचीत के बाद जिस तरह सियासी पारा चढ़ा उसके कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। आरजेडी नेता इसे लेकर गरम हैं और नीतीश को तरह तरह के ताने दे रहे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल भी बयान उछाल चुके हैं कि नीतीश यदि भाजपा को छोड़ महागठबन्धन में आएं, तभी पुनर्गठन हो सकता है। बताया जाता है कि भाजपा आलाकमान सारा मसला बेहद बारीकी से देख रहा है और समझा जा रहा है कि अगले महीने अपने एक दिनी पटना प्रवास के दौरान अमित शाह एनडीए घटक दलों खासकर जदयू और नीतीश से भी बातचीत करके इस मसले को हल करने की दिशा में निर्णायक पहल कर सकते हैं।

अमित शाह का एक दिवसीय प्रवास सुलझाएगा उलझनें

फिलहाल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आरंभिक दौर की बातचीत लोजपा नेता और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के साथ पहले ही नई दिल्ली में कर चुके हैं। रालोसपा नेता और केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी भाजपा से सीटों को लेकर बातचीत की बाट जोह रहे हैं। उधर, नीतीश कुमार को नजदीक से जानने वाले भी यह नहीं कह सकते कि बड़े फैसले करने के आदी नीतीश कुमार चुनाव से पहले आखिर करेंगे क्या। भाजपा आज की तारीख में जदयू की मांगों के अनुसार उसके लिए 25 सीटें छोड़ने की सोच भी नहीं सकती। पिछले चुनाव में भाजपा ने 22 और एनडीए ने सूबे की 40 में 32 सीटें जीतीं और अकेले चुनाव लड़कर जदयू ने 15.6 फीसदी वोट हासिल करते हुए मात्र दो सीटें जीतीं।

गणित क्या कहती है...आइए जानें

महागठबंधन में शामिल होकर जदयू ने विधानसभा चुनाव लड़ा तो वोट तो 16 फीसदी ही पाया पर सीटें 72 जीत लीं। यह भाजपा के खिलाफ वोटों के बिखराव को रोकने और आरजेडी के वोट बैंक के जुड़ने से संभव हो सका। हालांकि भाजपा भी चतुराई से चल रही है। पार्टी जीती हुई दरभंगा समेत दो सीटें छोड़कर बातचीत करने के मूड में है। पार्टी के नेता मानते हैं कि 20.20 सीटों का ऑप्शन है। बीस में जदयू और लोजपा बंटवारा कर ले और शेष बीस सीटों पर भाजपा अपने उम्मीदवार उतारे। उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा को लेकर भाजपा यह मानकर चल रही कि अंतिम समय तक वह एनडीए छोड़कर जा सकते हैं। हालांकि ऐसी सूरत नहीं भी आए तो भाजपा एडजस्ट कर सकती है।