
पटना हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां हीराबेन मोदी से जुड़ी डीपफेक वीडियो की घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पी.बी. बजंतरी की कोर्ट ने सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों, जैसे मेटा, गूगल, X और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को निर्देश दिया कि वीडियो को तुरंत हटाएं और इसकी सामग्री का प्रचार-प्रसार रोका जाए। कोर्ट ने इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को भी नोटिस भेजा है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत से आग्रह किया था कि संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया जाए कि इस प्रकार की भ्रामक और अपमानजनक सामग्री का प्रसार रोका जाए। अदालत ने माना कि इस वीडियो का उद्देश्य प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत और संवैधानिक छवि को नुकसान पहुँचाना है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
यह वीडियो 11 सितंबर को सोशल मीडिया पर जारी हुआ था, जिसकी अवधि मात्र 36 सेकंड थी। इसके बाद 14 सितंबर को दिल्ली में बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ FIR दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि यह वीडियो राहुल गांधी के इशारे पर तैयार कर फैलाया गया। वीडियो में दिखाया गया कि पीएम मोदी सो रहे हैं, तभी उनकी मां हीराबेन उनके पास आती हैं और उन्हें राजनीति पर कटाक्ष करते हुए डांटती हैं। वीडियो में कहा गया, “अरे बेटा, पहले तो तुमने मुझे नोट बंदी की लंबी लाइन में खड़ा किया, अब बिहार में मेरे नाम पर राजनीति कर रहे हो।”
बीजेपी नेताओं ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से फर्जी वीडियो है, जिसे डीपफेक तकनीक का उपयोग कर तैयार किया गया। उनका आरोप है कि कांग्रेस चुनाव से पहले प्रधानमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए गलत तरीके अपना रही है। यह मामला पिछले महीने दरभंगा में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के दौरान भी सुर्खियों में आया था, जब पीएम मोदी और उनकी मां को लेकर मंच से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था। इसके बाद बीजेपी ने कांग्रेस और राजद पर आरोप लगाया कि वे जानबूझकर प्रधानमंत्री की छवि धूमिल कर रहे हैं। पीएम मोदी ने खुद कहा था कि उनकी माँ अब इस दुनिया में नहीं हैं, फिर भी उन्हें राजनीति में घसीटा गया, जो बेहद दुखद है।
Updated on:
17 Sept 2025 01:22 pm
Published on:
17 Sept 2025 01:05 pm
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