
राम विलास पासवान की दही-चूडा भोज में पीएम मोदी। फाइल फोटो
Makar Sankranti 2026: बिहार में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज की चर्चा बिहार के सियासी गलियारे में खूब रहती है। भोज में दही और गुड़ की मिठास से ज्यादा बनते बिगड़ते राजनीतिक समीकरण को लेकर होती है। यह भोज का सिलसिला करीब एक हफ्ते तक पटना के सियासत के दोनों खेमों में चलता है। इस भोज में भीड़ भी खूब होती है। लेकिन, सभी की नजर विभिन्न राजनीतिक दलों के बागी पर रहती है। टिकारी (गया) का तिलकुट (तिल का व्यंजन), गंगा के दियारा इलाके से मलाई वाली दही और भागलपुर का कतरनी चावल के चूड़ा के साथ कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले पर भी अन्तिम मुहर भी लगती है। इस वर्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज दे रहे हैं। कभी लालू प्रसाद मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज दिया करता थे। उसके बाद इसका विस्तार पटना से दिल्ली तक हुआ।
लालू प्रसाद की ही तर्ज पर रामविलास पासवान ने दिल्ली में मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही भोज की परंपरा शुरू की थी। राम विलास पासवान शुरू में इस भोज में पत्रकारों और कुछ बिहार के नेताओं को बुलाया करते थे। लेकिन, बाद में इसका विस्तार हुआ और इस भोज में पीएम मोदी तक शामिल हुए। यह लालू यादव की परंपरा का ही दिल्ली में विस्तार माना जाता था। लेकिन, इस भोज की चर्चा खूब होती थी।
2014 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद 2015 में होने वाला बिहार विधानसभा चुनाव एनडीए के लिए एक बड़ी चुनौती थी। नीतीश कुमार एनडीए छोड़कर महागठबंधन का हिस्सा बन गए थे। नीतीश के साथ छोड़ने पर बिहार में महागठबंधन एनडीए के मुकाबले मजबूत था। एनडीए लोकसभा चुनाव में मिली बंपर जीत का सिलसिला बिहार में
जारी रखना चाहता था। इसको लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। कहा जाता है कि अपनी इस रणनीति के तहत ही पीएम मोदी 2015 में राम विलास पासवान की ओर से दिल्ली में मकर संक्रांति पर आयोतजित दही -चूडा भोज में शामिल होकर दलित कार्ड के साथ साथ लोकसभा चुनाव के बाद लोजपा के साथ भाजपा का गठबंधन विधानसभा में भी चलता रहेगा का संकेत दिया था।
मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले चूड़ा दही भोज का विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं को भी बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि दावत के दौरान वैसे दरवाजे भी खुल जाते हैं, जो सामान्य दिनों में सिर्फ मंत्री-विधायकों और अति वीआइपी के लिए ही खुलते हैं। दावत के दौरान बड़े नेताओं के आवासों में प्रवेश के लिए आम लोगों को भी इजाजत लेने की जरूरत नहीं होती है। यही वह मौका होता है,जब अदना कार्यकर्ताओं का भी सख्त और अनुशासन के नाम पर रिजर्व रहने वाले अपने आलाकमान से सहज तरीके से मिलना-जुलना हो जाता है।
मगर इस बार आरजेडी प्रमुख की ओर से मकर संक्रांति पर होने वाला दही-चूड़ा नहीं होगा। लेकिन, लालू प्रसाद ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के घर पर मकर संक्रांति पर आयोजित होने वाले दही चूड़ा भोज में जाने की जरूर अपनी सहमति प्रदान की है। तेज प्रताप यादव ने शुक्रवार को लालू प्रसाद से मिलकर उनको इसमें आने का निमंत्रण दिया है।
Updated on:
10 Jan 2026 08:47 am
Published on:
10 Jan 2026 07:36 am
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