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Makar Sankranti 2026: दही चूड़ा भोज पर अक्सर बदलती है बिहार की सियासी तस्वीर, लालू यादव ने शुरू की थी परंपरा

Makar Sankranti 2026 बिहार में चूड़ा- दही भोज को तेज प्रताप यादव काफी चर्चा में हैं। इस परंपरा की शुरूआत भी वर्ष 1994-95 में लालू प्रसाद ने ही की थी।

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दही-चूड़ा भोज में नीतीश कुमार को तिलक लगाते लालू प्रसाद। फाइल फोटो

Makar Sankranti 2026 मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज को लेकर बिहार की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। राजनीति में दही–चूड़ा का भोज एक पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि इसके पीछे सियासी संकेत भी छिपे हैं। लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के दौर में दही–चूड़ा भोज राजनीतिक मेल-मिलाप और बड़े फैसलों का यह मंच रहा है। दही-चूड़ा भोज के दौरान बिहार के सियासी गलियारे में करीब दो हफ्ते तक सियासत के दोनों खेमों में चूड़ा दही के दावतों का दौर चलता है। भीड़ भी खूब होती है। कोई टिकारी (गया) से गुड़ का तिलकुट (तिल का व्यंजन) मंगाता है तो कोई गंगा के दियारा इलाके से मलाई समेत दही। भागलपुर के कतरनी चावल से बनाए गए चूड़ा की चर्चा भी छाई रहती है। इस भोज में ही कई तरह की राजनीतिक समीकरण बनते और बिगड़ने के भी कई उदाहरण भी हर साल निकल आते हैं।

लालू प्रसाद ने शुरू की ये परंपरा

दरअसल, बिहार में 1994-95 में लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री रहते हुए दही-चूड़ा भोज की शुरुआत की थी। इसी वर्ष जॉर्ज फर्नाडीज के नेतृत्व में नीतीश कुमार जनता दल से अलग हो गए थे। लालू ने इसके बाद अपनी आम लोगों तक पैठ बढ़ाने के लिए दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था। तब मीडिया में इसकी खूब चर्चा हुई। इसके बाद तो लालू ने परंपरा ही बना डाली थी। पटना में लालू प्रसाद संक्रांति पर हर साल दो दिन का अपने आवास पर चूड़ा दही का आयोजन करने लगे। एक दिन नेताओं-कार्यकर्ताओं के लिए। अगले दिन झुग्गी-झोपड़ी वालों के लिए। मुख्यमंत्री आवास से सटे झुग्गियों के लोगों को लालू बुलाते और खुद से परोसकर उनको चूड़ा दही खिलाते थे। लालू के इस चूड़ा दही भोज के तब मुख्य अतिथि होते थे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्पीकर राधानंदन झा और राजो सिंह।

भोज के बाद बिहार में बदल गई थी सरकार

मकर संक्रांति पर लालू प्रसाद के आवास पर आयोजित होने वाली दही-चूड़ा भोज का राजनीति से भी बड़ा कनेक्शन रहा है। साल 2017 में नीतीश कुमार महागठबंधन सरकार के मुखिया थे। वर्षों बाद राबड़ी आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में वे शामिल होने गए। दही-चूड़ा भोज के बाद लालू प्रसाद ने 2017 में नीतीश को दही का टीका लगाया। लालू प्रसाद ने इसके बाद मीडिया से कहा कि भाजपा के जादू-टोने का असर अब नहीं होगा। लेकिन, भोज के कुछ महीने बाद ही नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़ एनडीए में शामिल हो गए थे। वे फिर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हुए और एनडीए सरकार के सीएम बन गए थे।

मेरे साथ भोज खाने पर लोग आपको बदनाम करेंगे

चारा घोटाले में लालू प्रसाद रांची के जेल में बंद थे। 12 जनवरी 2018 को रांची हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद की जमानत को खारिज कर दिया। लालू प्रसाद ने इसके बाद कोर्ट से गुहार लगाई- हुजूर, जमानत नहीं दीजिएगा तो दही-चूड़ा भोज कैसे देंगे? हजारों लोग इसमें आते हैं। हम वहां नहीं रहेंगे तो बेइज्जती होगी। इसपर जज शिवपाल सिंह ने कहा कि चिंता न कीजिए। हमलोग यहीं दही-चूड़ा खाएंगे। इसपर हाजिरजवाबी लालू प्रसाद ने बोले- नहीं हुजूर। मेरे साथ भोज खाने पर लोग आपको भी बदनाम कर देंगे।