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प्रशांत किशोर पर BJP का हमला: सांसद बोले- बिहार में जन सुराज का कोई भविष्य नहीं

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बयान पर बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जानिए उन्होंने बिहार की राजनीति और जन सुराज को लेकर क्या कहा है?
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पटना

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Rahul Yadav

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Mukul Kumar

•

Jul 05, 2026

प्रशांत किशोर

जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर। (Photo-IANS)

Prashant Kishor Jan Suraaj: बिहार में उपचुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बयान पर बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि जन सुराज का बिहार में कोई भविष्य नहीं है। मिश्रा ने कहा कि पार्टी पहले भी विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

उन्होंने यह भी कहा कि जन सुराज के पास न कोई स्पष्ट विचारधारा है और न ही कोई ठोस उद्देश्य। यह बयान ऐसे बयान में आया है, जब जन सुराज ने प्रशांत किशोर को बांकीपुर विधानसभा से उम्मीदवार बनाया है।

2024 में प्रशांत किशोर ने बनाई थी पार्टी

प्रशांत किशोर, जो पहले कई बड़ी पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाते थे, अब खुद मैदान में हैं। 2024 में गांधी जयंती पर उन्होंने जन सुराज पार्टी बनाई। शुरू में यह अभियान के रूप में चला, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुशासन जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।

उन्होंने पदयात्रा निकाली, गांव-गांव घूमे, युवाओं से जुड़े। कई लोग उनकी बातों से प्रभावित भी हुए। लेकिन चुनावी मैदान में पार्टी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई।

वोट शेयर करीब 3.5 प्रतिशत रहा। कई सीटों पर जमानत भी जब्त हो गई। कुछ सीटों पर पार्टी ने वोट बांटे, जिससे NDA या महागठबंधन के समीकरण प्रभावित हुए, लेकिन खुद को स्थापित नहीं कर सकी।

पीके ने लगाए हैं भ्रष्टाचार का आरोप

बिहार में एनडीए की सरकार है और प्रशांत किशोर ने कई मौकों पर सत्ताधारी दलों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कुछ बीजेपी नेताओं के नाम लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बता दें कि बिहार में लंबे समय से राजद-कांग्रेस का महागठबंधन और एनडीए के बीच मुकाबला चल रहा है। प्रशांत किशोर तीसरा मोर्चा बनाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि पुरानी पार्टियां बिहार को बदल नहीं सकीं, अब जनता को नया विकल्प चाहिए।

उधर, आलोचक मानते हैं कि बिना मजबूत संगठन और स्थानीय नेताओं के सिर्फ एक चेहरे पर पार्टी नहीं चलती। कुछ नेता जन सुराज से जुड़े और फिर अलग भी हो गए।

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