18 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

24 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट: सम्राट चौधरी पेश करेंगे विश्वास मत, बिहार विधानसभा का विशेष सत्र घोषित

बिहार विधानसभा का विशेष सत्र 24 अप्रैल को बुलाया गया है। इस दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी सरकार का विश्वास मत सदन में पेश करेंगे।

2 min read
Google source verification

मुरेठा में सम्राट चौधरी। (फोटो- IANS)

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गठित नई एनडीए सरकार 24 अप्रैल को विधानसभा में अपना विश्वास मत पेश करेगी। विधानसभा सचिवालय ने शनिवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत विशेष सत्र आगामी शुक्रवार, 24 अप्रैल को बुलाया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मुख्यमंत्री सदन में अपनी सरकार का विश्वास मत हासिल करेंगे।

अधिसूचना के अनुसार, सभी सदस्यों से 24 अप्रैल को सुबह 11 बजे सदन में उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है। यह विशेष सत्र एक दिन का होगा। एनडीए के पास सदन में स्पष्ट बहुमत होने के कारण इसे औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा है, और उम्मीद है कि मुख्यमंत्री आसानी से विश्वास मत हासिल कर लेंगे।

243 में 201 के साथ NDA मजबूत

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए गठबंधन के पास प्रचंड बहुमत है। 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा, जदयू समेत सहयोगी दलों ने 243 में से 202 सीटें जीती थीं। भाजपा के नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वे पटना की बांकीपुर सीट से विधायक थे, जो फिलहाल खाली है। इसके चलते अभी एनडीए के पास विधानसभा में 201 सदस्य हैं।

गठबंधन के भीतर भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक हैं। 243 सदस्यीय सदन में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वहीं, विपक्षी महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं।

क्या है विश्वास मत की प्रक्रिया?

संविधान के अनुच्छेद 163, 164 और 175 के तहत, राज्य में नई सरकार के गठन के बाद राज्यपाल के निर्देश पर विधानसभा का सत्र बुलाया जाता है, ताकि बहुमत परीक्षण कराया जा सके। नई सरकार सदन में विश्वास मत हासिल कर यह साबित करती है कि उसे कुल सदस्यों का बहुमत प्राप्त है। मुख्यमंत्री स्वयं सदन में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश करते हैं, जिस पर चर्चा होती है। इसके बाद ध्वनि मत या मतदान के जरिए प्रस्ताव को पारित या अस्वीकार करने का निर्णय लिया जाता है।