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ईसा पूर्व एक हजार साल पहले गुलजार था यह शहर

( Bihar News ) जिले के नवगछिया अनुमंडल के बिहपुर के गरवाडीह में एक हजार वर्ष ईसा ( City was Before Christ ) पूर्व की काले और लाल मृदभांड संस्कृति और द्वितीय नगरीकरण से लेकर बारहवीं शताब्दी ( 12th centuray ) तक की भौतिक संस्कृतियों से जुड़े अवशेष मिले हैं।

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पटना

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Yogendra Yogi

Feb 03, 2020

ईसा पूर्व एक हजार साल पहले गुलजार था यह शहर

ईसा पूर्व एक हजार साल पहले गुलजार था यह शहर

भागलपुर(प्रियरंजन भारती): ( Bihar News ) जिले के नवगछिया अनुमंडल के बिहपुर के गरवाडीह में एक हजार वर्ष ईसा ( City was Before Christ ) पूर्व की काले और लाल मृदभांड संस्कृति और द्वितीय नगरीकरण से लेकर बारहवीं शताब्दी ( 12th centuray ) तक की भौतिक संस्कृतियों से जुड़े अवशेष मिले हैं। पुरातात्विक अध्ययन दल के अनुसार गरवाडीह अंग प्रदेश की राजधानी चंपा से भी पुरानी है।

चंपा का अभ्युदय 6 शताब्दी ईसा पूर्व हुआ था
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष डॉ बिहारी लाल चौधरी तथा पुरातात्विक अध्ययन दल के सदस्य ने बताया कि यहां के अवशेष 12 वीं शताब्दी की भौतिक संस्कृतियों से जुड़े हैं। महानगर के रूप में चंपा का अभ्युदय छठी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था।

कोसी नदी में हो गया विलीन
गरवाडीह में एक पुराने टीले की खुदाई में अद्भुत सामग्रियां निकलकर पिछले दिनों आई थीं। यहां बीआरडब्लू काल के पात्रों का मिलना दरअसल नगरीय अवस्थापना से पूर्व की स्थितियों को दर्शाता है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में जब लोहे के उपयोग के कारण अधिशेष उत्पादन हुआ और नगरों का विकास शुरु हुआ तब अग प्रदेश की राजधानी चंपा अस्तित्व में आई। यहां टेराकोटा की मूर्तियां, बर्तनों के टुकड़े, सिल लोढ़ा, चौड़े आकार की ईंट, बर्तनों और तांबे के टुकड़े आदि मिले हैं। इस क्षेत्र की निरंतरता बारहवीं सदी तक सुरक्षित रही बताई जाती है। अंग का महाजनपद के रूप में विकास होता गया। यह कालांतर में कोसी के कटाव में विलीन होता चला गया। पुरातत्व विभाग ने इस क्षेत्र को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया है।