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पश्चिम एशिया युद्ध का असर: होर्मुज़ संकट से बिहार को 500 करोड़ का नुकसान, मखाना और चावल का एक्सपोर्ट ठप

बिहार का आयात-निर्यात बड़े पैमाने पर पश्चिम एशियाई देशों और वहां से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है, जिस कारण मौजूदा हालात का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है।
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पटना

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 9 Apr 2026, 10:19 PM IST

मखाना। फोटो-सांकेतिक

मखाना (फॉक्स नट्स) समेत कई उत्पादों के निर्यात पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का नकारात्मक असर पड़ा है। मांग और कीमतों में भारी गिरावट के कारण व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

पटना के बाहरी इलाके बिहटा स्थित प्रिंसटन मगध इनलैंड ड्राई पोर्ट पर भी निर्यात गतिविधियां युद्ध के चलते बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ड्राई पोर्ट के ऑपरेशंस इंचार्ज सुधीर कुमार ने कहा, “ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण आयात-निर्यात की गतिविधियां धीमी हो गई हैं। इसका सीधा असर बाजार पर दिख रहा है। हमें उम्मीद है कि हालात जल्द सामान्य होंगे।”

होर्मुज़ संकट से बिहार को 500 करोड़ का नुकसान

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बंद होने से बिहार को लगभग 500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। इससे सिर्फ पेट्रोल और गैस का संकट ही नहीं पैदा हुआ है, बल्कि पश्चिम एशिया से आयात और उस क्षेत्र में निर्यात भी बेहद प्रभावित हुआ है।

स्थिति यह है कि मखाना, चावल और सब्जियों जैसी वस्तुओं का निर्यात फिलहाल ठप पड़ गया है। दरअसल, बिहार का आयात-निर्यात बड़े पैमाने पर पश्चिम एशियाई देशों और वहां से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है, जिस कारण मौजूदा हालात का सीधा असर कारोबार पर पड़ा है।

ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर नाकेबंदी लगाए जाने के बाद से, सऊदी अरब, UAE और क़तर को चावल, सब्ज़ियों और मखाने का एक्सपोर्ट करना और भी मुश्किल हो गया है।